संत कबीर पर दोहे
गुरु कबीर को है नमन्,जिन ने बाँटा ज्ञान। ख़ूब यहाँ पर रच दिया,सामाजिक उत्थान।। सद्गुरु प्रखर कबीर थे,फैलाकर आलोक। परे
Read Moreगुरु कबीर को है नमन्,जिन ने बाँटा ज्ञान। ख़ूब यहाँ पर रच दिया,सामाजिक उत्थान।। सद्गुरु प्रखर कबीर थे,फैलाकर आलोक। परे
Read Moreआग उगलती लेखनी,मेरी सुबहो शाम। जो बदले युग को सदा,लाये नव आयाम।। लेखन में जब सत्य हो,परिवर्तन का भाव। वही
Read Moreसंयम का है ही नहीं,किंचित यहां विकल्प। संयम को नित मानना,आगत का संकल्प।। संयम को तो मानकर,मानव बने महान ।
Read Moreपर्यावरण के सामने , संकट है गंभीर प्रदूषित हो गए है आज हवा,थल,नीर ।। चला रहें पेडों पर ऑरी,कुल्हाड़ी,तीर स्वार्थ में
Read Moreनैनों से जग देखते,नैन सदा वरदान। नैनों में संवेदना,नैनों में अभिमान ।। नैन अगर करुणा भरे,तब नैनों में नीर। नैनों
Read Moreइंसां होना है कठिन,सुन तू ऐ भगवान। देख परेशानी ज़रा,जीना ना आसान।। इंसां नित ही भोगता,कष्ट,दर्द का शाप। दुख के
Read Moreगर्मी में प्यासे फिरें,बंधु परिन्दे आज। कोई रखता नीर नहिं,कैसा हुआ समाज।। नहीं सकोरे अब रखें,छत,आँगन में सून। खग को
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