दोहे – शब्दों का मेला
शब्द-शब्द है चेतना,शब्द -शब्द झंकार।मिले सृष्टि को जागरण,शब्द रचें आकार।। शब्द विश्व का रूप है, शब्द बने उजियार।शब्द उच्च उर्जा
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Read Moreबाबा बोले मूत्र पिएँ, पीते श्रद्धावान।मगर दलित का जल बने, छूते ही अपमान॥ नेत्र मूँद कर मानते, बाबा को भगवान।तर्क
Read Moreमोबाइल ने छीन ली, हँसी-खुशी की बात।घर के भीतर भी नहीं, दिल से कोई साथ।। पिता लगे संदेश में, माँ
Read Moreसूना जब आँगन लगे, बने न कोई बात।सब्र रखो उस वक़्त में, वही बने सौगात॥ धन वैभव जब पास हो,
Read Moreपुण्य कर्म जब उदयित होते, जीवन निज सार्थक होता, मानवता ही धर्म मनुज का, सहज मिटे भव-भव गोता, पूजन, वंदन,
Read Moreस्वार्थ भरी इस भीड़ में, खोए अपने लोग।चाहत की इस दौड़ में, छूट गए सब योग॥ सत्य हुआ अब मौन
Read Moreईद हमारा पर्व है, करवा तेरा प्यार।चाँद मगर अनजान है, किसका है अधिकार॥ बँट गया आकाश यूँ, बँट गए अरमान।चाँद
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