बालगीत – मैं लाल गगरिया पानी की
मैं लाल गगरिया पानी की। माटी से बनी कहानी भी।। जिस कुम्भकार ने मुझे गढ़ा। नव स्वेद कणों का पाठ
Read Moreमैं लाल गगरिया पानी की। माटी से बनी कहानी भी।। जिस कुम्भकार ने मुझे गढ़ा। नव स्वेद कणों का पाठ
Read Moreजब से मुँह पर लगा मुसीका। रहता सबको ध्यान उसीका। होठों की मुस्कान छिपाई। यह बचाव की अटल दवाई।। रोग
Read Moreगरमी के दिन आते ही, सूरज का चढ़ता पारा। ओह हाय ऊफ़ तौब़ा, करने लगता जग सारा। तन से छूटता
Read Moreपंचतंत्र की कथा सुनाता बच्चों सुन लो ध्यान लगाय ज्ञान धर्म की बातें सुनना शिक्षा कभी व्यर्थ न जाय कौआ
Read Moreलाल – लाल तरबूजा आया । मैंने जी भर कर वह खाया।। गर्मी का मधु फल तरबूजा। मीठा ऐसा ज्यों
Read Moreबाहर कोरोना की मार बच्चों रहना होशियार वायरस है यह एक नन्हा सा मगर करे छुप-छुपकर वार…… बार-बार हाथ तुम
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