नर्सरी से कॉलेज तक, एडमिशन की युद्धभूमि
आज शिक्षा का अर्थ सीखना नहीं, बल्कि साबित करना हो गया है। साबित करना कि बच्चा बेहतर है, तेज़ है,
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Read More“ज्ञान बढ़ा पर भाव क्या, अब भी मन लाचार”—यह पंक्ति केवल एक दोहा नहीं, बल्कि इक्कीसवीं सदी के मनुष्य की
Read Moreजैसे ही आप परीक्षा का परिणाम खोलते हैं, ऐसा लगता है कि ब्रह्मांड एक अक्षर या तीन अंकों की संख्या
Read Moreआज के दौर में ‘शिक्षा’ और ‘परीक्षा’ एक-दूसरे के पर्याय बन गए हैं। जैसे ही बच्चा स्कूल में कदम रखता
Read Moreडिजिटल विकर्षणों के प्रभुत्व वाले युग में, विज्ञान समाचार पत्र युवा दिमाग को आकार देने के लिए एक शांत लेकिन
Read Moreआज के डिजिटल युग में, सोशल मीडिया ने पुस्तक मेलों के अनुभव, प्रचार और याद रखने के तरीके को बदल
Read Moreशिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान का संचय नहीं, बल्कि व्यक्ति को विवेकशील, संवेदनशील और उत्तरदायी नागरिक बनाने की प्रक्रिया है। किंतु
Read Moreगुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर, छत्तीसगढ़ में आयोजित एक साहित्यिक कार्यक्रम के दौरान हिन्दी के वरिष्ठ कथाकार मनोज रूपड़ा के साथ
Read Moreहरियाणा की शिक्षा व्यवस्था आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहाँ प्रश्न केवल संसाधनों की कमी का नहीं, बल्कि
Read Moreहर छात्र के जीवन में ऐसे दौर आते हैं जब किताब खुली होती है, आँखें पन्नों पर होती हैं, लेकिन
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