एलिमनी के बिना तो तलाक भी नहीं होता
वसंत कई दिनों के वियोग यात्रा की थकान हो गया था सर्द बेरोजगारी के दर्द को समेटे हुए घर वापस
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Read Moreघर लौटा वसंत लगभग दस माह की अविरल यात्रा के बाद थकान, मलिनता और क्लांति के भावों को चेहरे पर
Read Moreतुम्हारे नाम ये आखिरी खत,लिख रहा हूँ दिल की स्याही में डूबो कर,शब्द कांप रहे हैं कागज़ पर,पर जज़्बात बहते
Read Moreचुनाव प्रचार तो, चलो थम गयाअब थोड़ी शांति, भी आएगीपर कड़वाहट जो,इतनी फैल गयीक्या वह कुछ, कम हो पाएगी सम्बन्ध,
Read Moreदेश के आर्थिक विकास के लिए कई पहलुओं को ध्यान में रखकर सब का साथ सबका विकास करने के लिए
Read Moreगीत गजल दोहे चौपाई भटक रहे हैं मन मरुस्थल मेंकिस से पीर बताई जाए यह भी गायब वह भी गायबमंच
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