Monthly Archives: October 2014

  • आप ही बताइए

    आप ही बताइए

    बचा लिया मैंने जलती हुई अधजली औरत को पूरी जलने से अधजली इसलिए कि मैं उसकी करनी की उसे चाहती थी देना सजा| अब आप ही बताइए? मैं दयावान या निर्दयी। एक बच्चे को मैंने बचा...

  • मुझे यही एक आस है

    मुझे यही एक आस है

    सब कुछ पास है फिर क्यों लगता है कुछ खोया सा है अरसा हुआ तुझे विदा किये फिर क्यूँ तू मेरे आस -पास है नज़र टिकी है दरवाज़े पर हर आहट बस तेरी ही आस है ये...




  • पदार्पण

    पदार्पण

    पदार्पण मेरे मन में मन ही मन तुमसे प्रेम हेतु छा जाये पागलपन तुम्हारा मन जहाँ जाये उसका करूँ मैं अनुगमन सिवा प्रेम अनुभव के कुछ न सूझे तुम्हारे नाम का मेरी धड़कन करे उच्चारण तुम्हारी...

  • ख्वाब

    ख्वाब

    दिल मेरा बडा वीरान नज़र आता है सोचती हूं तुम्हें इस में बसा के देखूं जानती हूं तुमसे वफा की उम्मीद है बेकार फिर भी चाहा वादा वफा का निभा के देखूं तुम एक पल न...


  • अपहरण

    अपहरण

      वही आनन वही नयन सुराहीदार गर्दन अधरों पर वही मनमोहक मुस्कान का आकर्षण जिसका मेरे सपनो में अक्सर किया करता हैं मेरा अचेतन प्रदर्शन बांहों में भरकर वही गर्मजोशी से भरा आलिंगन गालों पर वही...

  • पक्का इरादा

    प्रीति और विनोद अपने शादी शुदा  दोस्त मीना और रवि से मिलने जा रहे थे।  वो कॉलेज के समय के दोस्त थे। ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद वह सभी अपनी-अपनी ज़िंदगियों में व्यस्त हो गए थे।...