गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल (दर्द दे वो चले पर दवा कौन दे)

ग़ज़ल (दर्द दे वो चले पर दवा कौन दे)

बह्र:- 212*4

दर्द दे वो चले पर दवा कौन दे,
साँस थमने लगी अब दुआ कौन दे।

चाहतें दफ़्न सब हो के दिल में रहीं,
जब जफ़ा ही लिखी तो वफ़ा कौन दे।

उनकी यादों में उजड़ा है ये आशियाँ,
इसको फिर से बसा घर बना कौन दे।

ख़ार उन्माद नफ़रत के पनपे यहाँ,
गुल महब्बत के इसमें खिला कौन दे।

देश फिर ये बँटे ख्वाब देखे कई,
जड़ से इन जाहिलों को मिटा कौन दे।

ज़िंदगी से हो मायूस तन्हा बहुत,
हाथको थाम कर आसरा कौन दे।

मौत आती नहीं, जी भी सकते नहीं,
ऐ ‘नमन’ अब सुहानी कज़ा कौन दे।

बासुदेव अग्रवाल ‘नमन’
तिनसुकिया
09-09-2016

बासुदेव अग्रवाल 'नमन'

नाम- बासुदेव अग्रवाल; जन्म दिन - 28 अगस्त, 1952; निवास स्थान - तिनसुकिया (असम) रुचि - काव्य की हर विधा में सृजन करना। हिन्दी साहित्य की हर प्रचलित छंद, गीत, नवगीत, हाइकु, सेदोका, वर्ण पिरामिड, गज़ल, मुक्तक, सवैया, घनाक्षरी इत्यादि। सम्मान- मेरी रचनाएँ देश के सम्मानित समाचारपत्र और अधिकांश प्रतिष्ठित वेब साइट में नियमित रूप से प्रकाशित होती रहती हैं। हिन्दी साहित्य से जुड़े विभिन्न ग्रूप और संस्थानों से कई अलंकरण और प्रसस्ति पत्र नियमित प्राप्त होते रहते हैं। प्रकाशित पुस्तकें- गूगल प्ले स्टोर पर मेरी दो निशुल्क ई बुक प्रकाशित हैं। (1) "मात्रिक छंद प्रभा" जिसकी गूगल बुक आइ डी :- 37RT28H2PD2 है। (यह 132 पृष्ठ की पुस्तक है जिसमें मात्रिक छंदों की मेरी 91 कविताएँ विधान सहित संग्रहित हैं। पुस्तक के अंत में 'मात्रिक छंद कोष' दिया गया है जिसमें 160 के करीब मात्रिक छंद विधान सहित सूचीबद्ध हैं।) (2) "वर्णिक छंद प्रभा" जिसकी गूगल बुक आइ डी :- 509X0BCCWRD है। (यह 134 पृष्ठ की पुस्तक है जिसमें वर्णिक छंदों की मेरी 95 कविताएँ विधान सहित संग्रहित हैं। पुस्तक के अंत में 'वर्णिक छंद कोष' दिया गया है जिसमें 430 के करीब वर्णिक छंद विधान सहित सूचीबद्ध हैं।)

2 thoughts on “ग़ज़ल (दर्द दे वो चले पर दवा कौन दे)

  • विजय कुमार सिंघल

    बढ़िया ग़ज़ल !

  • विजय कुमार सिंघल

    बढ़िया ग़ज़ल !

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