Monthly Archives: September 2016

  • “गीतिका/गजल”

    “गीतिका/गजल”

    मात्रा भार-26 घास पूस लिए बनते छप्पर छांव देखे हैं हाथ-हाथ बने साथ चाह निज गाँव देखे हैं गलियां पगडंडी जुड़ जाएं अपनी राह लिए खेत संग खलिहान में चलते पाँव देखे हैं॥ आँधी-पानी बिजली कड़के...

  • बरसात

    बरसात

    “रूत तो बहुत आयी बरसात की, भीगना अच्छा ना लगता था। इस बार न जाने क्या बात हुयी, घंटो भीगते रहे बरसात में।”……. चार वर्ष पहले राज को लिखा अपना खत पति के कागजो में देख...

  • ग़जल

    ग़जल

    सबको वो देखता है, सब उसकी नज़र है, ना फिक्र करो लोगों, उसे सबकी फिकर है! मुश्किल बडी राहें मेरी, हैं गुमनाम मंजिले, तन्हा कटेगा कैसे, बडा लंबा सफर है! समझा नहीं कभी भी, कोई उसकी...

  • लघुकथा : मेहमान की बेटी

    लघुकथा : मेहमान की बेटी

    आज घर आये मेहमान ने बातों ही बातों में मेरे पापा से अपनी बेटी के लिए रिश्ता खोजने को कहा । इसके लिए पापा ने उनकी बेटी का क्वालिफिकेशन पूछ लिया, किन्तु अपनी बेटी के बारे...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

      मुहब्बत में नजाकत से मुझे पैगाम लिक्खा है सनम ने रेत पर उँगली से मेरा नाम लिक्खा है मुबारक हो मिरे महबूब दुनिया की तुझे दौलत मेरी तकदीर ने हिस्से में मेरे जाम लिक्खा है...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    दिल चाहता है कासिद जब लाए कोई पैगाम, लिखा हो तेरे हाथों से और बस हो मेरे नाम हम अलमस्त फकीरों को ना दुनिया की परवाह, दीवाने हैं दीवानों को दुनिया से क्या काम अहद-ए-वफा ने...



  • दोहे

    दोहे

    पहन मुखौटे झूठ के, करते लोग कमाल । जो दिल छलनी कर रहे, वही पूछते हाल ।। ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• रसना में रस घोलिए, मत करिए रसहीन । रसना में रस ना रहें, सब कुछ लेती छीन ।।...