Monthly Archives: March 2017


  • एक अवधी ग़ज़ल

    एक अवधी ग़ज़ल

    कोई  पक्का  मकान  थोरै   है । दिन दशा कुछ ठिकान थोरै है ।। सिर्फ कुर्सी मा जान है अटकी । ऊ दलित का मुहान थोरै है ।। ई वी ऍम में कहाँ घुसे हाथी। छोटा...

  • ओ माँ

    ओ माँ

    ओ माँ ओ माँ इधर तो आओ मुझे कुछ कहना। मुझे तूने जिन्दगी दी है तेरे साथ है अब रहना। मेरी खुशी अब तेरी खुशी बन गई है यहाँ पर, अब तेरे पास रहकर मुझे तेरे...

  • “पिरामिड”

    “पिरामिड”

    मेरे पूरे परिवार के तरफ से आप के पूरे परिवार को पावन चैत्री नवरात्र व नववर्ष की हार्दिक बधाई सह मंगल शुभकामना…….. (1) माँ तेरा दर्शन जन जन अभिलाषी है शक्ति भक्ति न्यारी पधारो अनुपमा॥ (2)...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    आज के दिन के सूर्योदय से ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना प्रारम्भ की थी। आज के दिन सम्राट विक्रमादित्य ने राज्य स्थापित किया था इनके नाम पर ही विक्रमी संवत प्रारम्भ होता है। आज के...

  • मठाधीशी

    मठाधीशी

    रात में दो बजे के बाद बेचैनी में अचानक मेरी नींद खुल गई. बेचैनी कोई खास नहीं थी. एक स्वप्न ने मुझे बेचैन कर दिया था. मैं एक व्यक्ति के साथ किसी बस्ती में भ्रमण कर...


  • जिंदगी के रंग कई रे

    जिंदगी के रंग कई रे

    घर परिवार में शादी का माहौल है। सब सजने सवँरने  में  उत्साह से जुटे हुए है। ममता व्यस्त होने का नाटक करती इधर-उधर में लगी हुई है  क्योंकि सजना सँवरना  उसकी किस्मत में नहीं, उसकी जिंदगी...