कविता

अच्छा है…

कुछ रिश्ते पुराने से रहे तो अच्छा है वक़्त की धूल न चढ़े तो ही अच्छा है वही अपनापन बना रहे तो अच्छा है वक़्त के साथ इंसान बदलते देखा है इंसान की शख्सियत बदलते देखा है खुद में खुद बन कर रहो तो अच्छा है मौलिकता बरकरार रखो तो अच्छा है उड़ो पर ज़मीं […]

गीत/नवगीत

हाथों में

लकीरों का जाल है बस इन खाली हाथों में हाथ में कुछ है नहीं,इन मेहनतकश हाथों में दिन भर करता है मजदूरी, पापी पेट की है ये मजबूरी कुछ नहीं ये पाता,सिर्फ छाले हैं इन हाथों में फिर भी हारे नहीं, वो हिम्मत है इन हाथों में घर से दूर रहने की मजबूरी घर में […]

मुक्तक/दोहा

चेहरा

हर चेहरे के पीछे भी एक चेहरा छिपा होता है हर मुस्कुराहट के पीछे भी तो दर्द छिपा होता है ज़िन्दगी के नाटक में सभी का किरदार होता है किसी को कम किसी को ज्यादा वक़्त मिलता है वो,जिनके चेहरे पे ना कोई मुखौटा लगा होता है वो,जिनकी आँखों में जज़्बात का समुंदर होता है […]

कविता

प्यार

प्यार त्योहार नहीं जिसे एक दिन पूजा जाए प्यार तो इबादत है जिसे हर दिन जिया जाए प्यार व्यापार नहीं जिसे किसी से तोला जाए प्यार का वजन इतना कि उसे नापा ना जाये प्यार है,खेल नहीं जो मनमर्जी से खेला जाए प्यार जिम्मेदारी है,उसे दिल से निभाया जाए प्यार अमानत नहीं,जो तिजोरी में रखा […]

गीतिका/ग़ज़ल

शोर

इस सन्नाटे में मेरे अंदर क्यूँ हो रहा एक शोर सा है उजाला फिर भी मन में अंधेरा बड़ा घनघोर सा हूँ किसी राह पे खड़ा पर जाने क्यूँ थमा सा हूँ मैं? जाने किसका है मुझे इंतेज़ार क्यूँ खोया सा हूँ मैं? दिल में अब हो रहा इकट्ठा बातों का एक ढेर सा ढेरों […]

कविता

नई कहानी

चलो चलें हम फिर से एक नई कहानी लिखने नई सोच व नए जोश से नया इतिहास लिखने सर्वसम्पन्न हैं हम और अतिविश्वास है साथ में ख्वाब हैं आसमानी,संग हौसला भी है साथ में बढ़ चले हैं हम नए दौर की नई मिसाल बनने जो हम पे हँसते आए,अब उनका आदर्श बनने माना हम धनी […]

भजन/भावगीत

देवा श्री गणेशा

हे विघ्नहर्ता देवा श्री गणेशा सब सुख समृद्ध सदा बने रहें ये कृपा हम पर रखना हमेशा हे मंगलमूर्ति देवा श्री गणेशा कभी भटके न,यूँ ही बढ़ते रहें सही मार्ग पर हमें रखना हमेशा हे अष्टविनायक देवा श्री गणेशा विवेक व बुद्धि सदा साथ बने रहें अच्छे कर्म का बोध रखना हमेशा हे सिद्धिदाता देवा […]

कविता

भारत की बेटी

बड़े गर्व से कहती हूँ मैं भारत की बेटी हूँ संस्कृति व सभ्यता का सम्मान सदा मैं करती हूँ सभी मुझपर गर्व करें कोशिश यही करती हूँ आदर और सम्मान का ध्यान सदा मैं रखती हूँ देश का मान बना रहे विचार यही मैं रखती हूँ इस मिट्टी की खुशबू से जुड़ी सदा मैं रहती […]

कविता

वो ही पथ प्रदर्शक

वो ही पथ प्रदर्शक वो सर्व ज्ञान दाता हर मानव के भीतर ज्ञान प्रकाश फैलाता इंसान होने का वो अर्थ हमें बतलाता जीवन के चौराहे पर सही राह दिखलाता उस राह ले जाने को वो सारथी बन जाता गुरुपूर्णिमा दिवस पर सादर नमन मैं करता — आशीष शर्मा ‘अमृत ‘

गीत/नवगीत

गर्जना

अभी भी वक़्त है, खुद को ढूंढ लो ज़रा कहीं जो गुम है कब से, उसे पा लो ज़रा भुला न देना खुद को ये दुनिया के मेले में बड़े कीमती हो तुम,बस ये समझ लो ज़रा ज़ालिम है दुनिया,तुम्हें खुद से जुदा कर देगी अपने सांचे में तुम्हें ढलने पे मजबूर कर देगी खुद […]