कहानी

पितृवंचिता

अजीत शर्मा , सुबह सुबह उठे।  पत्नी शिखा ने गरम गरम प्याली चाय की पकड़ाई।  साथ ही उसने सासु माँ को भी कांसे के गिलास में ऊपर तक भरकर चाय दी।  चाय क्या थी ,दूध और इलायची सौंफ आदि का काढ़ा।  सासु माँ इसमें ऊपर से एक चम्मच असली घी डलवाती थीं मगर अब डॉक्टरों […]

संस्मरण

अतीत की अनुगूंज -19 : असुरक्षित बचपन और परिणाम

ली एक चुप्पा सा बालक था। सत्र के शुरू में कक्षा में यह सुनिश्चित करना कठिन होता है की कौन सा बच्चा कितना होशियार है काम में अतः सबको नामाक्षर क्रम में बैठाया जाता है।   इससे उनके नाम याद करने में भी आसानी होती है।   ली अपने मित्र के पास ही बैठा। उसे अपने हिसाब से   बैठाया तो वह वापिस उसी […]

संस्मरण

अतीत की अनुगूंज – १७ : असलियत और भ्रम

      मेरी  अध्यापन की  पहली नौकरी का पहला वर्ष पूरा हो चुका था।  अब मैं पक्की अध्यापिका घोषित कर दी गयी थी।  जहां नौकरी मिली थी वह  शिक्षण संस्था बहुत निम्न कोटि की मानी जाती थी।  लंदन के क्षेत्रों के अनुसार संस्थाओं का स्तर  भी निर्धारित होता है।  यह लड़कों का स्कूल था। इसमें अधिकाँश बच्चे मजदूर वर्ग के […]

संस्मरण

अतीत की अनुगूंज -16 : पितु मात सहायक स्वामि सखा…

यह मेरा बीता हुआ कल नहीं है, यह एक अमर स्मृति है। जून की दो तारीख को मेरा जन्मदिन है। इस अवसर पर मैं भगवान् को धन्यवाद करते हुए अपना यह अनमोल अनुभव आप सबसे साझा करना चाहती हूँ। पिछले सितम्बर की बात है। हम, मैं और मेरे पति मॉस्को देखने गए, मुझे चलने में […]

संस्मरण

अतीत की अनुगूंज – 15 : पफ 

एक मोटी सी, सुन्दर लड़की अपने कुत्ते को टहलाती मेरी नई कक्षा के सामने आ खड़ी हुई। दो मिनट  बाद उसने पीछे मुड़कर जोर से आवाज़ दी, ” एड्रियन ‘.  एड्रियन फिर भी न आया। वह झल्लाई और चिल्लाई, “यू वांट मी टू बॉक्स योर ईयर्स इन फ्रंट ऑफ़ योर न्यू टीचर?” ( तुम चाहते हो कि […]

संस्मरण

अतीत की अनुगूंज -14 : ईस्टर और मैं

इस देश में आई तो जनवरी का महीना था।  और दो महीने लगे घर ज़माने में।  एक कमरा और सांझी रसोई  . उसमे एक ही छोटी सी मेज़ जिसपर रोटी बेली जा सके। मैं अपना खाना बनाकर कमरे में ले जाती थी।  मकान मालकिन एक नाइजीरिया से आई नर्स थी। बेहद भली. . अक्सर मेरी देखभाल करती थी।  मई […]

संस्मरण

अतीत की अनुगूँज – 13 : पंछियों की वापसी और एक याद

         मार्च आ गया है। ठण्ड बहुत पडी है और तूफ़ान भी एक के बाद एक अलग अलग नाम धरकर आये हैं।  तूफानों को इंसानों के नाम देना मौसम विभाग की परम्परा है। अभी डेनिस नामक तूफ़ान ख़तम नहीं हुआ है। हवा तेज है और उसमे बर्फानी खुनक है।  मगर फूल अपनी […]

संस्मरण

अतीत की अनुगूँज -12 : पूर्वाग्रहों के साथ-साथ

पिछले सत्तर वर्ष हमने देखे हैं।  हममे से कोई भी छाती पर हाथ धरकर यह नहीं कह सकता कि हमें होश संभालने के साथ साथ मुसलामानों, नौकरों, जमादारिन आदि के प्रति आदर सिखाया गया था।  ये बात और है कि वकील नियाज़ी साहब के आने पर पापा या बाबूजी अदब से खड़े होकर सलाम करते […]

संस्मरण

जन्म शताब्दी संस्मरण

इस वर्ष मेरे पूज्य पिता श्री लक्ष्मी चरण जी की जन्म शताब्दी है।  पापाजी अत्यंत मेधावी व्यक्ति थे।  अपने स्वभाव में वह अतिशय उदार एवं सकारात्मक सोंच रखते थे।  उनके निकट जो भी कभी आया था उनको वर्षों के बाद भी याद करता है।  इस अवसर पर मैं उनके जीवन से जुड़े कुछ तथ्य उल्लिखित कर […]

संस्मरण

अतीत की अनुगूंज – १० : नैंसी का परिवार

सितम्बर में नया सत्र शुरू हुआ।  उस वर्ष मुझे पहली कक्षा को पढ़ाना था।  रंगा रंगी बच्चे। सब एक उम्र के मगर कोई समानता नहीं उनमे।  ३० में से दस बच्चे गोरे  अवश्य कहे जाएंगे मगर सबके माँ बाप अलग अलग देशों की खुरचन। अब कोई भूखा नंगा तो है नहीं इंग्लैंड में जो आप […]