गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

बेबस हुआ है आदमी कोरोना काल में उलझी है रूह आज फिर ऐसे सवाल में अपना अजीज कोई है बेसुध पड़ा हुआ जा भी नहीं सकता है मिलने अस्पताल में दो शब्द भी धीरज के पास किसी के नहीं कैसे सुकून पाये मन मन के मलाल में प्रभु तू बता हम कैसे जिए किस तरह […]

गीतिका/ग़ज़ल

अंधेरों का भरम

था अंधेरों का भरम सारे उजाले निकले जो सभी साथ थे सब लूटने वाले निकले * घर को था बंद किया पूरी सावधानी से लौट कर आये तो टूटे सभी ताले निकले * खूब अनदेखी की छोड़ आये बीच राहों में आखरी पल में वही चाहने वाले निकले * रख गया गिरवी कोई थाली पुरानी […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

जिंदगी के नाम पर बस यन्त्रवत आते हैं लोग उम्र जीते हैं मशीनी और चले जाते है लोग बेबसी के दौर में है एक सा सबका  वज़ूद बीच घुटनो के महज़ चेहरा छुपा पाते हैं लोग दलदली सारी व्यवस्था उग रही पी कर लहू सूखते तालाब में फ़ूलों से मुरझाते हैं लोग क्यों कभी फरियाद […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

गर जरूरी हो तभी घर से निकलना चहिये चलने वालों से सही दूरी भी रखना चहिए जाने मिल जाये कहां कोई कोरोना वाला आपके अपना एहतियात तो रखना चाहिए आग पीती चिमनियाँ जब धूँवा उगलती है दर्द के एहसास से ये भी पिघलती है जब कहीं होता सृजन कल कारखानो में तब वहीँ इस्पात से […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

खुद बखुद आसान सारे मरहले हो जायेंगे तेरी हिम्मत से हज़ारों सिलसिले हो जायेंगे दोस्तों मंजिल की दूरी से न घबराना कभी रफ्ता -रफ्ता रास्ते खुद काफिले हो जायेंगे सिर्फ धरती ही नहीं आकाश भी थर्रायेगा अपनी आवाजों के जिस दिन जलजले हो जायेँगे वो जो देते हैं हमेशा धमकियां तूफ़ान की दूब की मानिंद […]

गीत/नवगीत

गीत

नहीं मुझे योगी जी देंगे और न मोदी जी ही देंगे जो भी लिखा भाग में मेरे देगा वो घट घट का स्वामी जिनको लगता सत्य लिखा है वह करते हैं मेरा समर्थन और जिनको भ्रामक लगता है उनकी निंदा करती नर्तन वह संसार चलाने वाला कहलाता है अंतर्यामी जो भी लिखा भाग में मेरे […]

गीतिका/ग़ज़ल

पहली बार मिला

खुद से खुद को ही मिलने का अवसर यह पहली बार मिला लॉक डाउन ने मौका ये दिया जीवन को नया उपहार मिला जीवन की कलम सच की स्याही कुछ हर्फ उभरते आते हैं और नए फूल खिल जाते हैं जिनको ऐसा गुलजार मिला कुछ लोग ढूढते हैं कमियां बस ये न मिला बस वो […]

गीतिका/ग़ज़ल

सन्नाटा

हर गली नगर में सन्नाटा फैला है शहर में सन्नाटा सब माल बंद हर प्रतिष्ठान गजलों की बहर में सन्नाटा ये कर्फ्यू बहुत प्रभावी है सन्नाटा असर दिखाएगा कोरोना की दहशत इतनी तिर रहा कहर में सन्नाटा पनघट पर जहां भीड़ लगती मेला सा दिखाई देता था सागर और ताल तलैया की हर एक नहर […]

कविता

कविता

मेरी कविता मोहताज नहीं आडंबर और छलावों की मेरी कविता मोहताज नहीं प्रतिघातों और दुरावों की मेरी कविता जनमानस के अंतस को छूकर आती है मेरी कविता के बहने से चंदन की खुशबू आती है मेरी कविता सुनने वाला दिनमान चलाता है जीवन हर सुबह खिलाता है कलियाँ हर भोर जगाता है उपवन मेरी कविता […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक : कविता

जन -जीवन का आधार सतत वह ज्योति पुंज सविता ही है बंजर उपवन करने वाली जलधार सलिल सरिता ही है जो राह दिखाती युग -युग से आक्रांत क्लान्त मानव मन को घनघोर तिमिर मे आशा की वो एक किरण कविता ही है कविता मन की गहराई है बस शब्दों का विन्यास नहीं कविता संपूर्ण चेतना है […]