गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

खुद बखुद आसान सारे मरहले हो जायेंगे तेरी हिम्मत से हज़ारों सिलसिले हो जायेंगे दोस्तों मंजिल की दूरी से न घबराना कभी रफ्ता -रफ्ता रास्ते खुद काफिले हो जायेंगे सिर्फ धरती ही नहीं आकाश भी थर्रायेगा अपनी आवाजों के जिस दिन जलजले हो जायेँगे वो जो देते हैं हमेशा धमकियां तूफ़ान की दूब की मानिंद […]

गीत/नवगीत

गीत

नहीं मुझे योगी जी देंगे और न मोदी जी ही देंगे जो भी लिखा भाग में मेरे देगा वो घट घट का स्वामी जिनको लगता सत्य लिखा है वह करते हैं मेरा समर्थन और जिनको भ्रामक लगता है उनकी निंदा करती नर्तन वह संसार चलाने वाला कहलाता है अंतर्यामी जो भी लिखा भाग में मेरे […]

गीतिका/ग़ज़ल

पहली बार मिला

खुद से खुद को ही मिलने का अवसर यह पहली बार मिला लॉक डाउन ने मौका ये दिया जीवन को नया उपहार मिला जीवन की कलम सच की स्याही कुछ हर्फ उभरते आते हैं और नए फूल खिल जाते हैं जिनको ऐसा गुलजार मिला कुछ लोग ढूढते हैं कमियां बस ये न मिला बस वो […]

गीतिका/ग़ज़ल

सन्नाटा

हर गली नगर में सन्नाटा फैला है शहर में सन्नाटा सब माल बंद हर प्रतिष्ठान गजलों की बहर में सन्नाटा ये कर्फ्यू बहुत प्रभावी है सन्नाटा असर दिखाएगा कोरोना की दहशत इतनी तिर रहा कहर में सन्नाटा पनघट पर जहां भीड़ लगती मेला सा दिखाई देता था सागर और ताल तलैया की हर एक नहर […]

कविता

कविता

मेरी कविता मोहताज नहीं आडंबर और छलावों की मेरी कविता मोहताज नहीं प्रतिघातों और दुरावों की मेरी कविता जनमानस के अंतस को छूकर आती है मेरी कविता के बहने से चंदन की खुशबू आती है मेरी कविता सुनने वाला दिनमान चलाता है जीवन हर सुबह खिलाता है कलियाँ हर भोर जगाता है उपवन मेरी कविता […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक : कविता

जन -जीवन का आधार सतत वह ज्योति पुंज सविता ही है बंजर उपवन करने वाली जलधार सलिल सरिता ही है जो राह दिखाती युग -युग से आक्रांत क्लान्त मानव मन को घनघोर तिमिर मे आशा की वो एक किरण कविता ही है कविता मन की गहराई है बस शब्दों का विन्यास नहीं कविता संपूर्ण चेतना है […]

गीतिका/ग़ज़ल

वक्त के हाथों पिटे

वक़्त के हाथो पिटे शतरंज के मोहरे हैं हम खेल जब तक हो न अगला बेसबब हैं क्या करें स्वतः उगते हैं किसी वट वृक्ष पर आश्रित नहीं इस लिये इस दौर में हम बेअदब हैँ क्या करें गैर के तप से मिले देवत्व इस अरमान में इस दशा में वो अधर के बीच अब […]

गीतिका/ग़ज़ल

भूखा हिंदुस्तान लिखा

हमने तो अपने नगमो में दिल का सहज बयान लिखा कभी लिखी बेबस की पीड़ा और कभी तूफ़ान लिखा जात धरम मज़हब की बातें सब की सब बेमानी हैं जब तक कहीं किसी भी घर में भूखा हिंदुस्तान लिखा आँसू पानी काज़ल स्याही कागज दिल के वरक सभी हर इंसान यही कहता है उफ़ कितना […]

गीतिका/ग़ज़ल

समस्त नई पीढ़ी को समर्पित

ये दिन तुम पर भी आयेंगे अपनी पारी तुम समझो वृद्ध पिता की बूढी माँ की जिम्मेदारी   तुम समझो तुम्हे खिलाया गोद बिठा कर काँधे दुनिया दिखलाई क्यों अब हम तुम पर हैं भारी  क्या दुश्वारी  तुम समझो सारा जीवन देते आये कभी न झोली फैलाई क्यों चाहिए हमको अपनापन ये खुद्दारी  तुम समझो पथराई सूनी आँखों में […]

गीतिका/ग़ज़ल

अहिल्या की पीड़ा

जैसे तैसे जल रहे हैं अब तलक हमसे दिये यातनाओं के शिविर में कब तलक कोई जिये था अहम  मुनि का कि वो दुर्भावना थी इंद्र की हम जिसे पत्थर बने सदियों यूं ही भोगा किये प्यास बढ़ती जा रही है द्रोपदी के चीर सी उम्र का प्याला है खाली आदमी कैसे पिये टुकड़ा टुकड़ा […]