Author :

  • गीतिका

    गीतिका

    माना शिखर पर आ गए उपमान बन गए वह देश के कानून के प्रतिमान बन गए ले आया समय उनको जमीं पर उतार कर खुद भाषणो में अपने ही गुणगान बन गए जो आस्था के युगपुरुष...

  • लखनऊ के नाम एक ग़ज़ल

    लखनऊ के नाम एक ग़ज़ल

    जाने हो कब मयस्सर दीदार लखनऊ का इकरार लखनऊ का, इसरार लखनऊ का एहसास उनको क्या हो शाम ए अवध की जन्नत देखा नहीं जिन्होंने, बाजार लखनऊ का किसको खबर कि हमने कैसे गुजारे ये दिन छाया था रुह...


  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    नादान इस तरह से सारा जहान देखें जैसे नसीब अपना जलता मकान देखें तकलीफ आपको है हम भी समझ रहे हैं पंछी को चाहिए वह अपनी उड़ान देखें थे कहां से चले हम और खड़े हैं...



  • दो मुक्तक

    दो मुक्तक

    खुद को जनसेवक कहते पर नोटों के भिखमंगे हैं स्वार्थ के दलदल में डूबे है बतलाते हैं चंगे हैं सबने अपना काला धन देखो घोषित कर मुक्त किया? अजब गजब है राजनीति का यह हमाम सब...


  • आज की कविता

    आज की कविता

      मोदी जी के यही शिकार, कालाधन और भ्रष्टाचार सारा देश साथ में यार, जल्दी पकड़ो रंगे सियार बेईमान की खैर नहीं, आँच न सच को आए यार निकली सबकी सोच गलत, बैंकों में भी हैं...