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  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    नादान इस तरह से सारा जहान देखें जैसे नसीब अपना जलता मकान देखें तकलीफ आपको है हम भी समझ रहे हैं पंछी को चाहिए वह अपनी उड़ान देखें थे कहां से चले हम और खड़े हैं...



  • दो मुक्तक

    दो मुक्तक

    खुद को जनसेवक कहते पर नोटों के भिखमंगे हैं स्वार्थ के दलदल में डूबे है बतलाते हैं चंगे हैं सबने अपना काला धन देखो घोषित कर मुक्त किया? अजब गजब है राजनीति का यह हमाम सब...


  • आज की कविता

    आज की कविता

      मोदी जी के यही शिकार, कालाधन और भ्रष्टाचार सारा देश साथ में यार, जल्दी पकड़ो रंगे सियार बेईमान की खैर नहीं, आँच न सच को आए यार निकली सबकी सोच गलत, बैंकों में भी हैं...



  • गद्दारों की टोली में

    गद्दारों की टोली में

    देखो हाहाकार मचा है गद्दारों की टोली में है प्रयास में फिर भी सत्ता आ न सकेगी झोली में कुर्सी की चाहत में इतने नीचे गिरे यकीन नहीं शायद इनका नाम लिखा है आतंकी की गोली...