Author :

  • राह

    राह

    राह कैसी भी हो मगर रूकना नहीं करना ना तू चाटुकारिता तुम कहीं झुकना नहीं अकार को प्राप्त कर, विकार को छोड़ दे जो रास्ते हो प्रलय के उनको अब तू मोड़ दे तेरा यह कर्तव्य...

  • उपरवाला

    उपरवाला

    बहुत ढूंढा है मैंने ऊपर वाले को यहां पर मगर रास्ता उसका खुद के अंदर ही है घिरा रहता हूं हर वक्त रिश्ते-नातों से जहां भी देखता हूं आंखें मुंदी तो पता चला अंतिम क्षण में...

  • सरकारी स्कूल

    सरकारी स्कूल

        चलो आज तुम्हें एक सरकारी स्कूल की कहानी सुनाता हूं नंगे पैर ,बदन पर मां के हाथों से सिला हुआ आधा पजामा एक बनियान जिसके छेद घर की आर्थिक स्थिति को बयान करते हैं...

  • बचपन

    बचपन

    मोबाइल में उलझा हुआ बचपन गांव की गलियों को याद नहीं करता अकेले रहना पसंद करते हैं आजकल उन बूढी दीवारों से कोई बात नहीं करता वह झुर्रियों के बीच आंखें आशीर्वाद देने को बहुत कुछ...

  • ओस की बूँदें

    ओस की बूँदें

      सुबह की सोंधी सोंधी खुशबू हवा की ओस की बूंदों में नहाई घास पर चलते मेरे कदम लगता है इससे प्रिय मुझे कुछ भी नहीं जो एहसास है हर रोज एक सुबह का सूर्य की...

  • चेहरा

    चेहरा

      बहुत चीखा ,बहुत चिल्लाया कोशिश करता रहा, कभी रह ना पाया अब क्या करूं समझ से परे दिखता मुझे हर कोई बहरा है कोई नहीं है हाथ मिलाता कोई नहीं है हाथ बढ़ाता लगता है...

  • हमने

    हमने

    हमनें आन, बान और शान लिखा है हमनें लहू का कतरा-कतरा प्राण लिखा है हमनें तप ,त्याग वैराग लिखा है हमनें बुद्धि बल और ज्ञान लिखा है   परिचय - परवीन माटी नाम -परवीन माटी गाँव-...

  • अभिलाषा

    अभिलाषा

    अभिलाषा तपता रहूं आवे में जैसे कुम्हार के बनाए आवे में तपते हैं मटके ,दिये!! संघर्ष जारी है पग पग लहू का कतरा कतरा पुकारे दे दूंगा बलिदान हिंदी मां तेरे लिए! नहीं अभिलाषा अमरत्व की...

  • दिखावा

    दिखावा

    लोग दिखावा करते हैं कि वह मानते हैं भगवान को जब की असलियत यह होती है कि वह मानते नहीं इंसान को इतना ढोंग,इतना पाखंड इतना धूर्त धोखा करके इंसान इतना अमानूष हो गया है बेटी...

  • बचपन

    बचपन

      बहुत नाचे ,बहुत खेले वो कांटे भी बहुत झेले वो सरसों का खेत पिला अब मुझे बुलाता है वो बचपन का था इतराना मुझे अब याद आता है सभी की बात होती थी गजब की...