कविता

कोंपलें

अचेतना से निकलकर भविष्य की ओर झाँकती हुई नवस्फुटित कोंपलें जीवन की सार्थकता को परिभाषित कर रही है नर होकर भी निराश मन क्यों तेरी जिंदगी मुसीबतों से डर रही है थककर हार ना मान अंदर की जीवन शक्ति को पहचान बस चलते चलते चलते चल परिस्थितियों के दलदल से अब निकल घूम कर देख […]

कविता

मैट्रो

रोज का सफर है मैट्रो का हाँ जद्दोजहद जारी रहती है लोगों के चढने उतरने की किसी भी बखत लडने की अरे!!! लडना बाबू सीट के लिए लडना बड़े-बूढ़ों से बहस पर उतर आना जिद और भ्रम लिये बेवक्त आना बेवक्त जाना संस्कृति, संस्कारों को नहीं कभी सिंचना सभागार में अश्लीलता पर जोरदार ताली पीटना […]

गीतिका/ग़ज़ल

कैसे

बुझती हुई लौ को जलाएं कैसे मेरा दिल है साफ ये बताएं कैसे महफिल घूमती है उनके चारों तरफ हमें इश्क है उनसे जताएं कैसे वजन ज्यादा है मेरी बातों में ये अब वजन घटाएं कैसे तोहफे है आज भी अलमारी में रखे उनको वो तोहफे लौटाएं कैसे धुआं बहुत है यादों का अंदर मेरे […]

कविता

मकान

अभी मकान बनाया है दिल में अब जाकर मुंडेर सजानी है कहानियां लिखी हैं बहुत जो दुनिया को सुनानी है अंधेरा है शहर में चारों तरफ बुझे चेहरों से गुफ्तगू करनी है आग जो धधक रही अंदर खाली दिलों में लौ जलानी है

कविता

पिता

अपनी इच्छाओं पर अंकुश लगाकर जो तुम्हारे सपने पूरे करे तुम्हारा कलेजा इतना बड़ा कर दे कि तू किसी के सामने ना डरे वक्त के अंधेरों में जो दिया जलाए वही पूजनीय पिता कहलाए संघर्षों से बनाएं सीढियां ताकि तुम ऊपर जा सको जो सपने में सोचा है तुमने वो मुकाम तुम पा सको तुम्हारे […]

कविता

जरा

वक्त की आग में तप ने दो जरा अभी उत्पन्न हुआ हूं थोड़ा सा निखरने दो जरा युद्ध के मैदान में मैं भी आऊंगा शमशीर लेकर मुझे युद्ध कौशल में सवरने दो जरा ख्वाब है छोटा सा अंदर पलने दो जरा दोबारा आएगा सूरज अब ढलने दो जरा दुश्मन के पैंतरे काम नहीं आएंगे अब […]

हाइकु/सेदोका

शायर

तमाम बुरे हालातों में मैं कभी झुका नहीं अपनी मंजिल के रास्ते पर हूं कभी रुका नहीं दिल की महफिल अभी भी आबाद रखता हूं मैं वो शायर हूं जो कभी कहीं लूटा नहीं

कविता

किरदार

व्यथित मन ने कुछ कहा मैंने शब्दों में ढालकर लिखा किरदारों की गहमागहमी, किरदारों की बात मंच पर कोई है अंधा ,किसी का नहीं है हाथ संवेदनाओं का सैलाब उठा है जिसके ऊपर ब्रह्मांड टिका है दिखाऊं कैसे अब सबको मैं वो भूले बिसरे अनझूये हालात किरदारों की गहमागहमी, किरदारों की बात मंच पर कोई […]

कविता

सब कुछ ठीक हो जायेगा

यादें जुड़ी है सरसों के खेत से उनके साथ मैं भी रहता बस अब महसूस करने जाता हूं सब कुछ ठीक हो जाएगा खुद को यही समझाता हूं बचपन था अलबेला ना कोई परेशानी थी अठखेलियां करते थे बहुत रातें सितारों वाली थी खाली होते थे हाथ मगर खुशियां भरपूर थी जी लेते थे एक-एक […]

कविता

कुछ

कहा कुछ सुना कुछ दिया कुछ समझा कुछ लेना था कुछ देना था कुछ दिल में कुछ दिमाग़ में कुछ जताते कुछ बताते कुछ लाते कुछ ले जाते कुछ बह जाते कुछ रह जाते कुछ हैं कुछ और बताते कुछ और बस इन्हीं विरोधाभास में जीये जा रहे जिंदगी रोते कुछ हंसते कुछ झुर्रियां कुछ […]