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  • इंतजार

    इंतजार

    जिंदगी गुजर रही ,सोच-सोचकर यही रात ये ढलेगी जब, खिलुँगा मैं फिर तभी जब चला मैं दो कदम,दिल मेरा यूँ कह गया इरादों का एक कारवां, अंतर्मन से बह गया थमा-थमा सा मैं रूका,वक्त के पड़ाव...

  • गरीबों के

    गरीबों के

    फाईलों में दब जाते हैं नाम गरीबों के कुचले जाते हैं इरादे तमाम गरीबो के पकड़ते हैं पैसे वाले हाथ गिरेबान गरीबों के बस कागज पर ही खड़े होते मकान गरीबों के मंच से घोषणाएं सून...

  • बदल जाते हैं

    बदल जाते हैं

      मौसम का क्या बदलना इधर लोग बदल जाते हैं बना कर तमाशा गली में लोग यूं ही निकल जाते हैं बुरा वक्त है या इरादें कुछ और पैसा देखकर लोग फिसल जाते हैं काट काट...

  • कब तक?

    कब तक?

      वो जिया भी गरीब वो मरा भी गरीब वह पीला भी गरीब वो हरा भी गरीब उसके हालात भी गरीब थे उसके जज्बात भी गरीब थे उसके पूर्वज भी गरीब थे उसकी आने वाली पीढ़ी...

  • भूख

    भूख

      भूखी है जिंदगी मेरी साहेब! कुदाल और कस्सी का वजन नहीं देखती अब ना मुड़के देखती है पीठ पर सरकते पसीने को भूखी है जिंदगी मेरी साहेब! मूक बधिर बना दिया है भूख ने मंचों...

  • पूछ रहा हूँ

    पूछ रहा हूँ

    पूछ रहा हूं सब से कि मैं ढूंढ रहा हूं खुद को कहां हूं मैं ? क्या मैं जीवित हूं !!! या मेरा शरीर शिथिल पड़ गया है पाषाण से बैठा कहीं ढूंढता हूं झुर्रियों भरे...

  • आहिस्ता

    आहिस्ता

    बारिश की बौछारों में जब सुबह सुबह खिड़की खोली तो बरामदे में शहतूत से बँधी उस तार को देखा जिस पर बल्ब लगा था ,जो जलता-बुझता रहता था उस तार से एक एक करके बूँदें लगातार...

  • लड़की हुई है!

    लड़की हुई है!

      जिंदगी के घाव जब दर्द देते हैं तो मरहमपट्टी भी चुभने लगती है चोटों के निशान जिंदगी के भयावह उतार चढ़ाव फिर भी जीना है संकरे रास्तों पर चल अपना सर्वस्व समर्पित करके कुंठा और...

  • एहसास

    एहसास

    पहली बार मिले थे ,तब मैं तुम्हें बस देखता रहा उस समय मेरा ख्याल था, कि तुम्हें मैं अपनी आंखों में छुपा लूं बड़ी मुद्दतों और बड़ी कोशिशों के बाद मैं मिला तुमसे दोबारा अबकी बार...

  • नींद

    नींद

    नींद उचट गई है , बारिश की बूंदे भीनी भीनी आसमान से छिटक रही है सवाल था बूंदों से मेरी नींद में खलल क्यों डाल दिया ? जज्बातों की हांडी में कुछ शब्द पक रहे थे...