कविता

अबॉर्शन- एक विकृत…. सोच का

समाज में अपनी , विकृत मानसिकता को। छुपाने के लिए, अबॉर्शन करवाते हैं । कभी बेटों के लिए , कभी जायज- नाजायज , संबंधों के लिए, मानववादी सोच का , अपहरण तक कर आते हैं । वे लोग……….? अपनी ऐसी विकृत सोच का अबॉर्शन क्यों…..नहीं करवाते हैं? देश की अर्थव्यवस्था की , जो धज्जियां उड़ाते […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

नवरात्रि में सिद्धिदात्री मां तारा का पूजन

हिमाचल प्रदेश देवभूमि के नाम से जाना जाता है ।हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में नालागढ़ तहसील में पहाड़ी के ऊपर मां तारा देवी का कुदरत की वादियों में एक छोटा -सा प्राचीन मंदिर है। जीवनदायिनी मनोकामनाएं पूर्ण करती मां तारा नालागढ़ शहर अपनी गोद में बिठाए विराजमान हैं। नालागढ़ का एक प्राचीन इतिहास है। […]

कविता

मैं गांधी ना बन पाऊंगा

सत्य के मार्ग पर… तो चलूंगा।  लेकिन भ्रष्ट सोच को, अहिंसा से कैसे मिटाऊंगा।  मैं गांधी ना बन पाऊंगा।  क्या……… मैं गांधी बन।  एक गाल पर चांटा खाकर,  दूसरा गाल भी,  सामने कर जाऊंगा।  नहीं……….मैं  मजलूमों  पर उठने वाला, हाथ तोड़ कर आऊंगा।  मैं गांधी ना बन पाऊंगा।  जुल्मों के खिलाफ… क्या..?  धरना देकर मांग […]

कविता

मैं हिंद की बेटी हिंदी

मैं हिंद की बेटी हिंदी भारत के , उज्जवल माथे की। मैं ओजस्वी …बिंदी हूँ। मैं हिंद की बेटी …हिंदी हूँ। संस्कृत, पाली,प्राकृत, अपभ्रंश की, पीढ़ी -दर -पीढ़ी …सहेली हूँ। मैं जन-जन के ,मन को छूने की। एक सुरीली …सन्धि हूँ। मैं मातृभाषा …हिंदी हूँ। मैं देवभाषा , संस्कृत का आवाहन। राष्ट्रमान …हिंदी हूँ।। मैं […]

कविता

मुद्दे उठाए जाते हैं।

मेरे देश में, मुद्दे उठाए जाते हैं। जिंदगी के असल सच से, लोगों के ध्यान हटाए जाते हैं। घटना को , घटना होने के बाद , देकर दूसरा ही रुख। असल घटनाओं पर, पर्दे गिराए जाते हैं । मेरे देश में मुद्दे उठाए जाते हैं। जिंदगी किन, हालातों में बसर करती है। पंचवर्षीय सरकारों में […]

कविता

कोरोना काल और शिक्षक 

कोरोना काल में घर में बंद होकर। सबको जिंदगी के अहम सबक याद आए ।। कोरोना काल में घर में बंद होकर। सड़कों पर भटकते मजदूर , गरीब होने की सजा पा रहे थे।  जिंदगी के अच्छे दिन आएंगे।  यह स्लोगन भी याद आ रहे थे।  कोरोना ने कर दिया..क्या हाल।  टीवी देख कर आंख […]

कविता

श्रद्धा ही श्राद्ध है

श्रद्धा ही श्राद्ध है। इसमें कहाँ अपवाद है। सत्य …..सनातन सत्य। जो वैज्ञानिकता का आधार है। इसमें कहा अपवाद है। श्रद्धा ही श्राद्ध है। सत्य -सनातन संस्कृति पर, जो उंगलियां उठाते है। इसे ढोंगी, ढपोरशंखी बताते है। वो भरम में ही रह जाते है। आधें सच से, सच्चाई तक , कहाँ पहुंच पाते है। श्राद्ध […]

कविता

उलझनों के झूले

उलझनों के बीच भी मुस्कुराती हैं। अपने दर्द को दो घड़ी भूल जाती है। जिंदगी हर त्यौहार को , हर हाल में उदास होकर भी, खुशियों के झूले पर झूल जाती है। उलझनों के बीच भी मुस्कुराती हैं। अपने दर्द को दो घड़ी भूल जाती है । जिंदगी हर दिन , नयी लड़ाई के लिए […]

कविता

राधा – कृष्ण

हम जब अपने , अस्तित्व से ऊपर हो । अपना साक्षात्कार पा जाते है। ईश्वर आधाररूप प्रेम हो जाते है। उस क्षितिज बिंदु पर,राधा हो जाते है। जब समर्पित हो जाते है,  प्रेम का आसित्व हो जाते हैं । वो प्रेम में रमे , हृदय राधा  हो जाते है। जो ध्येय को समर्पित हो, ध्यान […]

कविता

वृद्ध …….नहीं बुद्ध

क्यों…. हम , वृद्ध अवस्था पर शोक करें। हमनें जिंदगी की, एक लम्बी लड़ाई लड़ी है। तो क्या…..? अब लड़ना छोड़ दें। हमनें हकीकतों के, तजुर्बे काटे है। वृद्ध अवस्था में, नकारात्मक सोच को सबसे पहले दिमाग से काट दे। दीजिए अपने , हुनर का खजाना। मत सोचिये…..! सहारा कौन होगा। सींचे अपना दायरा। अपनी […]