कविता

तंबाकू से जिंदगी बचाएं

तंबाकू से जिंदगी बचाएं जिंदगी तंबाकू की हवा में मत उड़ाएं। आज जिसे पी रहे …….??? एक नशे….. एक उन्माद में, ऐसा ना हो यह जिंदगी पी जाएं। जिंदगी तंबाकू की हवा में मत उड़ाएं। जिंदगी के एहसास को, लंबी-लंबी सांसों में जी जाएं। ऐसी सांस तंबाकू के साथ ना लें। जिससे जिंदगी काले धुएं […]

कविता

इस घड़ी ने …घड़े की

इस घड़ी ने घड़े की, कीमत बता दी। जो लोग… मिट्टी से टूट चुके थे। मिट्टी ने , आज अपनी , उनको अहमियत बता दी। इस घड़ी ने, घड़े की कीमत बता दी। युगों- युगों से यह बताते रहे। साथ मिट्टी के जीवन गीत गाते रहे। इस घड़ी ने,  घड़े की कीमत बता दी। जो […]

कविता

विकास ही नज़र आयेगा

फिर भी देश वासियों  ,  किसे क्या ….नजर आएगा।  विकास  ही नज़र आयेगा | आज़ादी  के  मूल्यों का , देश क्या -क्या  मूल्य  चुकायेगा | अब तक देश ही जानता है | राजनीतिक दलों द्वारा, कितना घसीटा  जायेंगा | फिर भी देश वासियों, विकास ही नज़र आयेंगा | सभ्यता की आड़ में  , विदेशी रंग  […]

कविता

जिंदगी सड़कों पर 

जिंदगी सड़कों पर , लाचार बैठी है। अपने घर और काम से , बेजार बैठी है । कोरोना क्या….. मारेगा । इन जिंदगियों को,  जो जिंदगीयां,  जिंदगी से लड़ने को , तैयार बैठी हैं । जिंदगी सड़कों पर , लाचार बैठी है।  घर -काम से,  निकाल दिया इनको, गाड़ी -बसों के लिए, अपने घर तक […]

कविता

महाराणा प्रताप 

 वीर भूमि राजस्थान का,  वह वीर प्रताप राणा था । जिसके साहस से कांप गया। अकबर ने लोहा माना था । 7 फुट के वीर का , 72 किलो का भाला था । 200 किलो का कवच पहनकर। चेतक पर चलता, आजादी का वीर मतवाला था। वीर भूमि राजस्थान का , वह वीर प्रताप राणा […]

कविता

मुझे …….अफसोस रहेगा

मुझे …….अफसोस रहेगा । जिदंगीयों को, अंधविश्वासों से दूर ले जाता । प्यार से जिंदगी है।  यह बात समझा पाता। विश्वास का, एक छोटा-सा ही सही। पर… एक घर बना पाता। समझ कर भी, न-समझी का खेद रहेगा। मुझे …….अफसोस रहेगा। अंधेरे दूर हो जायें, दिलदिमाग से भरमों के। अंधविश्वास की सोच से, निकाल कर, […]

कविता

वो…. नाचती थी

वो….. नाचती थी ? जीवन की, हकीकत से , अनजान। अपनी लय में, अपनी ताल में, हर बात से अनजान । वो…… नाचती थी ? सोचती………. थी? नाचना ही….. जिंदगी है । गीत- लय- ताल ही बंदगी है। नाचना…….. ही जिंदगी है । नहीं …….. शायद नाचना ही…. जिंदगी नहीं है । इंसान हालात से […]

कविता

गंगा घाट

गंगा तेरा घाट युगों- युगों से यात्रा मेरी, तेरे साथ- साथ चलती रही। जन्मों -जन्मों से गुजर कर , तुम पर ही तो आ के थमती रही। जिंदगी के एक घाट से, मौत के, दूसरे घाट तक का सफर। युगों- युगों से ना बदला है। ना बदलेगा । जन्मों- जन्मों का यह सफर। देखता हूँ……. […]

कविता

सीता की अग्नि परीक्षा …कब तक

सीता की अग्नि परीक्षा …कब तक नारी के आत्मसम्मान पर, उठते रहेगें प्रश्न? शायद जब तक। सीता की अग्नि परीक्षा …तब तक। जब तक नारी तुम मूक रहकर, सब सहती जाओगी। भीख में कैसी…… इज्जत पाओगी। बस हां में हां मिलाओंगी तब तक तुम देवी रूप पूजी जाओगी। तुम्हारे विद्रोह का ……एक शब्द, विचलित ना […]

कविता

मजदूर

कभी इंटें उठाता।  कभी तसले , मिट्टी  के भर -भर ले जाता।  पीठ पर लादकर ,  भारी बोझे,  वह चंद सिक्कों के लिए , एक मजदूर , कितना मजबूर हो जाता। ना सर्दी , ना गर्मी से घबराता। मजबूरी का , फायदा ठेकेदार उठाता। इतने पैसे ……नहीं मिलेंगे। मन मारकर , जो देना है ……….!!!!!!!! […]