कविता

यह कैसा वैशाख

जिंदगी की बैसाखियों पर, चलकर यह आज, कैसा वैशाख आया। न आज भांगड़े हैं। न मेले सजे हैं । फसल कटने -काटने का , किसे ख्याल आया।। ज़िंदगी की बैसाखियों पर, चलकर आज, कितना मजबूर वैशाख आया। गेहूँ की फसल का , घर के , आंगन में आज न ढेर आया । कोरोना विस्फोटक हुआ। […]

कविता

बार्डर  vs  कोरोना

ओह !!!ओह!!!!ओह!!!!!! क्वारंटाइन हुए जाते हैं।  टेस्ट डराते हैं । रिपोर्ट जब आती है । पोजिटिव कर जाती है। कि कोरोना कब जाओंगे । कोरोना कब जाओंगे ।। लिखो..क्या वैक्सीन से जाओंगे।।  तेरे साथ हर …घर सूना -सूना है । अस्पताल के डॉक्टर ने , वहां की नर्सों ने,  हमें रिपोर्ट में लिखा है । […]

कविता

जिंदगी के रंग

तेरे जीवन में रंग , तो ………तेरे ही भरने से आएगा। कोई रंग भरने , जीवन में तेरे , बाहर से नहीं आएगा । किस सोच में …….हो । कोई बांध के , रंगों को सारे, इंद्रधनुष…..! तेरे हाथ में थमा जाएगा। जिंदगी को तेरी , रंगों से रंगीन , वह कर जाएगा । कोई […]

पुस्तक समीक्षा

छंदों का पुनरुद्धार करवाता : “छंद विन्यास “काव्य रूप 

छंद विन्यास (काव्य रूप) डा संजीव कुमार चौधरी जी  पुस्तक मेंं छंदों के साथ कविता का जो रूप बन पड़ा है ।बहुत ही सुंदर ढंग से और सरल ढंग से पुस्तक  में संजोया गया है। काव्य के श्रृंगार को समझने वाले और मुक्त छंद में लिखने वाले जब एक बार इस  पुस्तक को पढ़ेंगे तो […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

शिव तत्व को आत्मसात करवाता पंचमुखी शिव मंदिर

देव -भूमि हिमाचल में जहां कण-कण  में भगवान शिव विराजमान है। बस आपको अपने भीतर शिव तत्व को आत्मसात करने की आवश्यकता है। जब आप ईश्वर का साक्षरताकार पा जाते हैं तो फिर आप बाहरी आडंबर ,उनकी परिकल्पना से परे हो जाते हैं।                  हिमाचल प्रदेश के जिला […]

कविता

महिलाएं क्या चाहती हैं।

 महिलाएं तो बस सम्मान चाहती है ।  बदलें में हर रिश्ते से,  फर्ज निभाती हुई भी जब अपमान ही पाती है । महिलाएं तो बस सम्मान चाहती है।। शक्ति स्तंभ होते हुए भी , समर्पित कर देती हैं खुद को।  वह प्रेम में कहां….  कोई व्यापार चाहती हैं । महिलाएं तो बस सम्मान चाहती हैं। […]

कविता

चंद्रशेखर आज़ाद

अपना नाम ……. आजाद । पिता का नाम …….. स्वतंत्रता बतलाता था।  जेल को , अपना घर कहता था। भारत मां की, जय -जयकार लगाता था। भाबरा की , माटी को अमर कर। उस दिन भारत का , सीना गर्व से फूला था । चंद्रशेखर आज़ाद के साथ , वंदे मातरम्…………. भारत मां की जय……. […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

मनुस्मृति में क्यों हुई नारी की विस्मृति?

इस तथ्य में कोई दो राय नहीं है कि भारतीय सभ्यता में नारी को देवी का दर्जा दिया जाता है। नारी का सम्मान सर्वोपरि है ।वह सारी सृष्टि की पालक और जीवन दायिनी  है। देखा जाए तो ऐसे कौन- से कारण रहे होंगे जिन्होंने नारी के वर्चस्व पर सवाल उठाते -उठाते उसे दीन -हीन और […]

कविता

प्रेरणा

तुम से प्रेरणा पा, नन्हे नन्हे कदमों से, इंसान ऊंचाईयों का, सफर तय कर जाता है। कितने बड़े बड़े , कामों को, पलों में कर जाता है। धरती से चांद तक की, दूरी तय कर जाता है। लेकिन हे ईश्वर……. तुम्हारे आगे खड़े होने पर, हर उड़ान को, बौनी ही पाता है । तुमसे प्ररेणा […]

कविता

बसंत तुम जब आते हो

बसंत तुम जब आते हो । प्रकृति में नव -उमंग,  उन्माद भर जाते हो। बसंत तुम जब आते हो हवाएं चलती हैं सुगंध ले कर। जीवन में खुशबू बिखराते हो। बसंत तुम जब आते हो।  कितने नए एहसास जागते हैं। सृजन की प्रेरणा दे । नित -नूतन संसार सजाते हो। हर तरफ फूलों से बगियाँ […]