कविता

कोरोना कहर

क्या दूं तुम्हें हुआ सब अंदर बाहर खाली तन-मन सब टूट रहा गई चेहरे की लाली भय में पूरा दिन बीते न नींद रात में आए घर में हैं कैद सब हुई खस्ता हालत माली सब डर में जीवन जी रहे हुई कोरोना मार बना रहे सभी दूरियां सब ठप्प हुए व्यापार चिंता चिता समान […]

कविता

जलता कश्मीर

क्यारियाँ केसर की रक्तिम हो गयी संवेदनायें मानव हृदय की सो गयी थी घाटी जो कभी जन्नत सी सुन्दर आतंक के कारण जहां से खो गयी धरा लाल चौक की खून से सनी है सरकार फिर भी मूकदर्शक बनी है आम-जन के बारे में सोचें भी कैसे दरबारों की अभी आपस में ठनी है उन्हें […]

कविता

कालाधन बनाम मोदी

नींद हराम कर चोरों की हँस रहे हो तुम आमजन के हृदय में रच बस रहे हो तुम लोग उठा फिर रहे कालाधन यहाँ- वहाँ दे नवीन निर्देश शिकंजा कस रहे हो तुम आज दे रहे गालियाँ तुम्हें केवल वे लोग पैदा किया है जिन्होंने कालेधन का रोग समय पर न चेत कर खजाने भरे […]

कविता

रोता होगा भगत

रोता होगा भगत देश का हाल देखकर नेताओं की नित बदलती चाल देखकर नि:संदेह ये तुम्हारे सपनों का देश नहीं अन्यथा बदल जाता यूं ही परिवेश नहीं अपने ही देश में उग्रवादी कहते हैं तुम्हें रहा अब कुछ भी इस उपरांत शेष नहीं बुना गद्दारों का ये मकड़जाल देखकर रोता होगा भगत… कोई राष्ट्र-पिता तो […]

गीत/नवगीत

गीतिका

मरघट के सन्नाटे में आवाज लगाने निकला हूँ मुरदों को नव-जीवन का राज बताने निकला हूँ संवेदनाहीन हुआ है जो मनुज हृदय पाषाण सम उस उर में पर पीड़ा की आग जलाने निकला हूँ नारी रुदन-क्रंदन भी विचलित जिन्हें करता नहीं उन कौरवों से द्रोपदी की लाज बचाने निकला हूँ भेड़ों के लिबास में घूमते […]

गीत/नवगीत

मुलाकात होली में

होगी उन से फिर मुलाकात होली में होगी नैनों से नैनों की बात होली में होंगे बरसों बाद फिर आमने-सामने जाने संभलेंगे कैसे ज़ज्बात होली में छुआ था तुमने जो गुलाल के बहाने बन गये थे प्यार के हालात होली में आज तक है याद वह छुअन तुम्हारी हुई थी जो प्रेम की बरसात होली […]

कविता

पागल

पागल़़…!!! यही कहता है जमाना । हटकर लीक से जो हूँ कर नहीं पाता कदम-ताल जमाने संग होता नहीं सहन अन्याय…अत्याचार हो किसी संग भी । बिना डरे अंजाम से जताता हूँ विरोध भ्रष्टाचार के विरुद्ध पर पाता हूँ स्वयं को…अल्पसंख्यक !!! तभी तो संख्या बहुल कह पाते हैं- ‘अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता’ […]

कविता

बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ

लिया तूने जब जन्म, फोड़ी क्यों हाँडी काली जन्म संग मिली नफरत, न गई नाज से पाली लड़का लेता जन्म जब, रौनक चेहरे पर आती करें बच्चों में भेदभाव, जगत की रीत निराली समझते क्यों बोझ तुझे, मानते क्यों तुझे रोग क्यों तेरे जन्म लेने से, यहाँ डरते हैं सब लोग प्रसवपूर्व लिंगजाँच करा, गर्भ […]

कविता

आया नव-वर्ष

फिर आया नव-वर्ष, ले परम उत्कर्ष चंहु ओर होंगी खुशियाँ-बधाईयाँ नव-वर्ष जो आया है फिर हर वर्ष की भाँति भूल जायेंगे सब वो चीत्कार …सिसकती नारियों की गौण हो जायेंगे फिर से बलात्कार, दुराचार, तेजाबी हमले फिर ये तथाकथित सभ्य लग जायेंगे दैनिक कार्यों में फिर नेता लड़ायेंगे जात-धर्म के नाम पर फिर सरहद पर […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

तेरी चाह में कुछ कर जाऊं तो अच्छा यूं तनहा जीने से मर जाऊं तो अच्छा जब माली ही न रहा इस गुलशन का टूट शाख से बिखर जाऊं तो अच्छा प्यार तेरा न पा सका, कोई बात नहीं तेरी यादों संग ही तर जाऊं तो अच्छा बदल सकी न जो लकीर इन हाथों की […]