कविता

अर्जुन की व्यथा

नहीं कर पाऊंगा कृष्ण मैं उनका अपमान, गुरु द्रोण, पितामह भीष्म हैं सूर्य  समान। गाण्डीव गिरता जाता समक्ष उनके क्या संभालूंगा मैं तीर कमान ? ये कैसा मायाजाल केशव तुमने बिछाया है ? अपनों के सामने अपनों को खड़ा पाया है। दांव पर लगा मेरे पुरखों का सम्मान, क्या संभालूंगा मैं तीर कमान ? माना […]

भजन/भावगीत

महादेव

नीलकंठ वो है गंगाधर मृत्युंजय, अज,भूपति हर शिव शंभु, हे महादेव वीरभद्र वो है पिनाकी रहते सदैव भी एकांकी गिरीश,अघन, जटा धारी हर शिव शंभू, हे महादेव शक्ति बिन शिव शव समान दिनन का वो रखते मान सामप्रिय,त्रियमूर्ति,प्रजापति हर शिव शंभू, हे महादेव भोले है वो निर्मल स्वभाव शमशानों में रहते फिर भी पवित्र अष्टमूर्ति, […]