Category : यात्रा वृत्तान्त

  • यात्रा वृतांत : छुक छुक रेल

    यात्रा वृतांत : छुक छुक रेल

    फिर वहीँ स्टेशन, वही रेल, वही पतली पट्टी वाली लोहे की डगर। चढ़ते उतरते धक्का मुक्की करती पसीने की कमाई हुई गठरी को सीने से चिपकाए परवरिश के रिश्ते। कोई आर.ए.सी., कोई कनफर्म तो कोई प्रतीक्षारत,...

  • मेरी पहली विदेश यात्रा

    मेरी पहली विदेश यात्रा

    इलाहाबाद के मोतीलाल नेहरू नेशनल इंजीनियरिंग इंस्टीटयूट सरकारी कॉलेज के कम्प्यूटर विभाग में, सहायक प्रोफेसर पद पर कार्यरत पतिदेव को जून में अमेरिका के मिसोरी राज्य में सेंट लुइस शहर में स्थित मिसोरी यूनिवर्सटी से विजिटिंग...

  • चलो कहीं सैर हो जाए –15

    चलो कहीं सैर हो जाए –15

    उस असुर की ख़ामोशी देखकर भोले बाबा अंतर्ध्यान होना ही चाहते थे कि वह कुटिल मुस्कान लिए कह उठा ” हे देवाधिदेव महादेव ! ठीक है मैं आपको सृष्टि के नियमों को तोड़ने के लिए विवश...


  • चलो कहीं सैर हो जाये –13

    चलो कहीं सैर हो जाये –13

    सीढियां उतरते हुए बाएं किनारे पड़ने वाले मंदिरों में शीश नवाते हाथ जोड़ते हम लोग आगे बढ़ रहे थे । अब सीढियाँ ख़त्म होनेवाली थीं और आगे मंदिर जैसा कुछ लग नहीं रहा था । इसके...



  • चलो कहीं सैर हो जाए –10

    चलो कहीं सैर हो जाए –10

    भैरवघाटी से भैरव बाबा के दर्शन कर हम सभी मित्र आगे बढे । अब आगे …………………………. हम लोग सोने तो चले गए थे लेकिन बीच बीच में उठकर बाहर दालान में आकर चल रहे मौजूदा नंबर...

  • चलो कहीं सैर हो जाये —9

    चलो कहीं सैर हो जाये —9

    भैरवघाटी से भैरव बाबा के दर्शन कर हम सभी मित्र आगे बढे । अब आगे …………………………. ढलान से उतरना काफी बढ़िया लग रहा था । दायीं तरफ यात्रियों की सुरक्षा के लिए मजबूत तारों की जाली...

  • चलो कहीं सैर हो   जाये  -8

    चलो कहीं सैर हो जाये -8

    पुर्वकथा सार : हम कुछ मित्र मुंबई से माता वैष्णोदेवी के दर्शन कर भैरव घाटी की ओर बढे । अब आगे ………………. माताजी के दिव्य स्वरुप को देख भैरव बाबा एक क्षण को तो हत्प्रभ रह...