यात्रा वृत्तान्त

मेरी जापान यात्रा – 12

नारा आठवीं शताब्दी में जापान की राजधानी हुआ करता था।  नारा का शाब्दिक अर्थ ” प्रसन्न ” है।  इस शब्द का मूल स्रोत हिंदी माना जाता है।   यह महात्मा बुद्ध के विशाल मंदिर के कारण प्रसिद्ध  है  . यहां टोडायजी मंदिर है जिसमे महात्मा बुद्ध की १५ मीटर यानि करीब पचास फ़ीट ऊंची कांसे की […]

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मेरी जापान यात्रा – 11

क्योटो  एक बहुत ऐतिहासिक नगर है।  यह जापान की राजधानी रहा है।  इस कारण यहां    बौद्ध धर्म और शिंटो धर्म दोनों ही के मठ  और मंदिर बहुतायत से मिले।          सुबह पहुंचते ही पहले सिटी टूर बुक करवाया।  ओसाका वाली गलती अब कभी भी दोहरानी नहीं थी।  चलना तो अच्छा है […]

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मेरी जापान यात्रा -10

कोबे से ओसाका केवल २० मिनट की दूरी पर है।  होटल के स्वागत कक्ष में लगे सचित्र ब्रोशर के अनुसार यहां इतनी चीजें देखने लायक नहीं थीं।  असल में हम थके भी थे।  अतः पूरा टूर नहीं बुक करा और सैलानियों की तरह निकल  पड़े।  जल्दी ही लगा कि बड़ी गलती कर दी।  अतः एक […]

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मेरी जापान यात्रा – 9

हिरोशिमा से हम कोबे गए। पर जाते ही होटल अपने पश्चिमी तरीके का बदल लिया।  कारण जापान में अभी भी देसी खुड्डी का रिवाज़ है।  पब्लिक टॉयलेट भी दोनों   तरह के बनाये गए हैं।  मगर उनकी सफाई बहुत थी। और हर जगह एक छोटा ,बच्चों के मतलब का टॉयलेट भी बना हुआ था।  चाहे वह […]

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मेरी जापान यात्रा – 8

सन १९६६ में जॉय मुकर्जी की फिल्म लव इन टोकियो ने हमें बहुत प्रभावित किया था। फिल्म तो आम हिंदी फिल्मो की तरह एक उलझी हुई प्रेम कथा ही थी ,मगर इसके बीच में इंटरवल से पहले हिरोशिमा में हुए बम काण्ड का पूरा किस्सा अंग्रेजी की एक डॉक्यूमेंट्री में दिखाया गया था जो अत्यंत […]

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मेरी जापान यात्रा – 7

अगली सुबह हमें बुलेट ट्रैन से यात्रा करनी है।  यह सिटिंग  कोच होगी सोंचकर अपना सामान कम किया। एक बड़ा सूटकेस होटल के लाकर में रखवा दिया। सात दिन की तफरी के बाद हमें यहीं से वापिस इंग्लैंड जाना होगा।  बहुत सुबह निकलना है।  टोकियो से  हिरोशिमा  की दूरी ८१२ किलोमीटर है, जिसे सामान्य रेलगाड़ी […]

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मेरी जापान यात्रा – 6

शाम को साढ़े चार बजे हम सब  शहर घूमते हुए वापिस जा रहे हैं।  हमारी गाइड बताती है कि जापान क्षेत्रफल में एक बेहद छोटा सा देश है।  इसलिए  शहरों को सुनियोजित करना बहुत आवश्यक है।  शहरों में बसें और ट्रेनें चलती हैं।  ट्रेनों में सफर करनेवाले बहुत सुबह अपने घरों से निकल जाते हैं।  […]

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मेरी जापान यात्रा – 5

गाइड बताती है कि हर वर्ष यहां एक मेला लगता है।  जिस लम्बी  सड़क से हम आये थे , उसके दोनों ओर मेज़ें आदि लगाकर अनेकों परिवार एवं संस्थाएं भोजन वितरित करती हैं।  औसत रूप से इस मेले में दस लाख यात्री आते हैं।  फिर भी कभी कोई कुचला या मरा नहीं। ना ही कोई […]

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मेरी जापान यात्रा – 4

हमारी बस एक जापानी मंदिर के आगे रुकती है।  अनेकों ध्वजा पताकाएं मंदिर के प्रांगण में बाँस के   सहारे पेड़ों पर लटकाई गयी हैं।  मंदिर में प्रवेश करने से पहले पानी के नलके लगे हैं जिनका पानी एक मांद  नुमा नहर में बहता रहता है। हमको एक लम्बी डंडी वाली करछी से पानी लेकर अपने […]

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मेरी जापान यात्रा – 3

सुबह जब होटल में नाश्ते के बाद रिसेप्शन पर भ्रमण आदि के लिए पूछने गए तो हलकी रिमझिम हो रही थी।  वहां खड़ी स्त्री उस होटल की मालकिन थी।  उसने हमसे पूछा कि क्या हमारा कोई प्लान है। हम इस विषय में अनभिज्ञ थे।  अतः उसी ने हमें सनराइज टूर के अंग्रेजी वाले कोच ट्रिप […]