यात्रा वृत्तान्त

जीवन को दें अनंत इंद्रधनुषी रंग

आप अपने जीवन को कितने रंग देते हैं, यह सब आपकी प्रतिभा व श्रम पर निर्भर करता है। जितना व्यक्ति समझदार होता है, संवेदनशील होता है, सृजनात्मक होता है, जागरुक व सजग होता है उतना ही स्वयं के जीवन को अनेकानेक रंग व उड़ानें देता है। जीवन को जितना सिकोड़ों, छोटा करो, सीमित कटघरे में […]

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हमारी तिरुपति यात्रा

तिरुपति वेंकटेश्वर मन्दिर भारत के सबसे प्रसिद्ध तीर्थस्थलों में से एक है। यह आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में स्थित है। प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में दर्शनार्थी यहां आते हैं। समुद्र तल से 3200 फीट ऊंचाई पर स्थित तिरुमला की पहाड़ियों पर बना श्री वेंकटेश्‍वर मंदिर यहां का सबसे बड़ा आकर्षण है। कई शताब्दी पूर्व […]

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बिना छत‌ का मंदिर : शिकारी माता का मंदिर

हिमाचल प्रदेश कुछ बातों में बहुत निराला है। वर्ष भर बर्फ से ढकी ऊंची चोटियां, शीत मरुस्थल, रसीले सेब के बागीचे, कांगड़ा की चाय, रोहतांग पास और अभी कुछ समय  पहले बनी मनाली को लेह-लद्दाख से जोड़ने वाली सुरंग के अंदर बनी लगभग 9 किलोमीटर लंबी सड़क जिससे बर्फ पड़ने पर भी यातायात वाधित नहीं […]

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बाग की बौद्ध गुफाएं 

छुट्टियों में यात्रा करने की योजना बनाई। प्राचीन गुफाओं को देखने को थी। यात्रा पूरी होने के पश्चात वहाँ जाने का वर्णन कुछ इस प्रकार है।मध्यप्रदेश के इंदौर संभाग के धार जिले के विकासखंड बाग़ के समीप लगभग 4 किलोमीटर की दूरी पर 5 वी -7 वी सदी में निर्मित 12 बौद्ध गुफाएं है । […]

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मेरी जापान यात्रा – 14

टाकायामा को शीश नवाकर हम अगली सुबह वापिस टोक्यो आये।  क्योंकि हम पहाड़ी इलाके से गुजर रहे थे नज़ारा बहुत सुन्दर मिला।  पहाड़ यहां बाँस के जंगलों से भरे थे।  बीच बीच में नदियों की जलधाराएं उतरती हुई नज़र आ जाती थीं।  गाड़ी की रफ़्तार इतनी तेज कि और कुछ समझ पाना कठिन लग रहा […]

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मेरी जापान यात्रा – 13

क्योटो का रेलवे स्टेशन मंदिर से बहुत दूर नहीं था।  हम अपनी छोटी छोटी सामान की ट्रॉलियां खींचते यथासमय  टाकायामा जानेवाली ट्रैन में बैठ गए।  यह लम्बी यात्रा होगी क्योंकि यह शहर टोक्यो से उत्तर पूर्व की तरफ पड़ता है।  और दूर भी है।  परन्तु जाना जरूरी है क्योंकि जब हम इंग्लैंड से आये थे […]

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मेरी जापान यात्रा – 12

नारा आठवीं शताब्दी में जापान की राजधानी हुआ करता था।  नारा का शाब्दिक अर्थ ” प्रसन्न ” है।  इस शब्द का मूल स्रोत हिंदी माना जाता है।   यह महात्मा बुद्ध के विशाल मंदिर के कारण प्रसिद्ध  है  . यहां टोडायजी मंदिर है जिसमे महात्मा बुद्ध की १५ मीटर यानि करीब पचास फ़ीट ऊंची कांसे की […]

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मेरी जापान यात्रा – 11

क्योटो  एक बहुत ऐतिहासिक नगर है।  यह जापान की राजधानी रहा है।  इस कारण यहां    बौद्ध धर्म और शिंटो धर्म दोनों ही के मठ  और मंदिर बहुतायत से मिले।          सुबह पहुंचते ही पहले सिटी टूर बुक करवाया।  ओसाका वाली गलती अब कभी भी दोहरानी नहीं थी।  चलना तो अच्छा है […]

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मेरी जापान यात्रा -10

कोबे से ओसाका केवल २० मिनट की दूरी पर है।  होटल के स्वागत कक्ष में लगे सचित्र ब्रोशर के अनुसार यहां इतनी चीजें देखने लायक नहीं थीं।  असल में हम थके भी थे।  अतः पूरा टूर नहीं बुक करा और सैलानियों की तरह निकल  पड़े।  जल्दी ही लगा कि बड़ी गलती कर दी।  अतः एक […]

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मेरी जापान यात्रा – 9

हिरोशिमा से हम कोबे गए। पर जाते ही होटल अपने पश्चिमी तरीके का बदल लिया।  कारण जापान में अभी भी देसी खुड्डी का रिवाज़ है।  पब्लिक टॉयलेट भी दोनों   तरह के बनाये गए हैं।  मगर उनकी सफाई बहुत थी। और हर जगह एक छोटा ,बच्चों के मतलब का टॉयलेट भी बना हुआ था।  चाहे वह […]