Category : ब्लॉग/परिचर्चा

  • सदाबहार काव्यालय-23

    सदाबहार काव्यालय-23

    गीत   चांदनी धुंध में नहाई है     आज  मानवता डगमगाई है, चांदनी धुंध में नहाई है.   पेड़ों से आ रही हैं आवाज़ें दूर हों हम न इस गुलिस्तां से दूरी मानव ने खुद बढ़ाई...

  • सदाबहार काव्यालय-21

    सदाबहार काव्यालय-21

    कविता रोको अन्याय के धारों को   मत रोको इन बरसातों को दो भीगने तन-मन-प्राणों को माना कपड़े गीले होंगे सड़कों के नट ढीले होंगे हिल जाएंगी नदियों की दाढ़ें भी आएंगी कुछ-कुछ बाढ़ें भी पर...

  • सदाबहार काव्यालय-18

    सदाबहार काव्यालय-18

    गीत नए वर्ष का संदेशा नई उमंगें नई तरंगें, वर्ष नया ले आया है सभी सुखी हों सब सम्पन्न हों, यह संदेशा लाया है-   नए वर्ष में नई पहल हो, जीवन सुगम-सरल अपना अनसुलझी जो...

  • फर्जी विज्ञापन में फंसते हम सभी

    फर्जी विज्ञापन में फंसते हम सभी

    राज्यसभा में समाजवादी पार्टी के सदस्य नरेश अग्रवाल ने शुक्रवार(28.12.17) को भ्रामक विज्ञापन का मुद्दा उठाया था. इसके जवाब में उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने भी अपना अनुभव साझा किया. अपना अनुभव बताते हुए नायडू ने कहा ’28...



  • बाबा रे बाबा

    बाबा रे बाबा

    पहले आशाराम, फिर रामपाल, उसके बाद रामवृक्ष, और राम रहीम ये सभी धर्मगुरु से अपना साम्राज्य विकसित कर चुके, अब अपराधी करार हो चुके हैं. इनमे रामवृक्ष तो मुठभेड़ में मारा गया बाकी अपराधी सजा भुगत...

  • सदाबहार काव्यालय-7

    सदाबहार काव्यालय-7

    देश हमारा   सर पर ताज हिमालय तो पग धोता हिन्द का सागर है धन-वैभव-ऐश्वर्य पूर्ण यह भरी प्रेम की गागर है कच्छ से ले आसाम तक फैली मेरी दोनों बाहें हैं मंजिल एक यहां है...

  • सदाबहार काव्यालय-6

    सदाबहार काव्यालय-6

    कविता   हिंदी: देश का भाग्य   हिंदी हमारी आन हमारी शान हमारे देश का ईमान. हिंदी हमारी आशा हर भारतवासी की अभिलाषा हमारी राष्ट्रभाषा.   हिंदी हमारा विश्वास बहुजन हित की आस राजभाषा के रूप...

  • सदाबहार काव्यालय-5

    सदाबहार काव्यालय-5

    गीत   सद्भावना जीवन-सार बने सद्भावना जीवन-सार बने, हर मानव का श्रृंगार बने- सद्भावना से कायम धरती यह भेद नहीं कोई करती जग-जीवन को सुदृढ़ करती हम धरती पर क्यों भार बनें? सद्भावना से भरपूर गगन...