भाषा-साहित्य

पूर्वोत्तर भारत में हिन्दी की बढ़ती लोकप्रियता

भारत बहुआयामी विविधता का सामासिक संगम है | तकरीबन 171 भाषाओं और 544 बोलियों के साथ 125 करोड़ आबादी वाला हमारा देश कश्मीर से कन्याकुमारी एवं कच्छ से अरुणांचल तक फैला हुआ है | संविधान सभा ने संविधान बनाते समय भारत के दक्षिणी और उत्तर – पूर्वी परिक्षेत्र को भाषाई आधार पर गैर हिन्दी मानते […]

भाषा-साहित्य

विश्व नागरी विज्ञान संस्थान

देवनागरी लिपि भारत की प्राचीन और सर्वाधिक भाषाओं में प्रयुक्त लिपि है। भारत के संविधान में हिन्दी भारत की राजभाषा के रूप में अभिमंडित करने के साथ-साथ देवनागरी लिपि को भी स्वीकार किया गया है। यह लिपि अशोककालीन ब्राह्नमी लिपियों की आधार लिपि है और आधुनिक भारतीय लिपियों के अध्ययन के लिए मूलभूत लिपि मानी […]

भाषा-साहित्य

शुद्ध भाषा / बोली के अस्तित्व की दरकार

कुछ बोलियाँ ऐसी है,जिनके बोलने वाले कुछ लोग अक्सर बोली मे अपशब्दों का प्रयोग तकिया कलाम के रूप मे करते है | चाहे वे जानवरों के लिये या लोगों के लिये बोली गई हो |ये बोली मे समाये अपशब्द गुस्से के समय या बराबरी के लोगों या आपसी बेरभाव निकालते समय जाहिर करते है |वे […]

भाषा-साहित्य

राम से जुड़कर नीदरलैंड में हिंदी का प्रवाह

विश्वास भाव आस्था का जनक है और आस्थाएं सुजन की जननी हैं । नीदरलैंड के अमस्टर्डम शहर के हाईवे के बगलगीर अपगाउडो स्थान पर पिछले 5 वर्ष से राम नाम धुन की गूंज हो रही है जिसका निनाद चारों दिशाओं में है । इस देश में आर्यसमाजियों और सनातन धर्मियों के कई धर्मस्थल हैं ,जहां […]

भाषा-साहित्य लेख

मीडिया के बदलते स्वरूप का असर

भारत एक लोकतांत्रिक राष्ट्र है और लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में मानी जाती है । लोकतंत्र के एक ऐसे स्तंभ रूप में जिसके बिना लोकतांत्रिक व्यवस्था की कल्पना ही नहीं की जा सकती । मीडिया को ये सम्मान यूंही नहीं मिला,बल्कि उसे इस सम्मान का हकदार बनाया है […]

भाषा-साहित्य

हिन्दी साहित्य के उत्थान के लिए पुस्तकें ख़रीदकर पढ़ें

हिंदी साहित्य के उत्थान के लिए आओ आज नववर्ष के इस पावन दिवस पर प्रण लें कि हम आज से पुस्तकें खरीद कर ही पढ़ेंगे….. मित्रो, प्रत्येक लेखक का यह स्वप्न होता है कि उसका सृजन पुस्तक के रूप में प्रकाशित हो और ज्यादा से ज्यादा लोग उसे पढ़ें भी । प्रत्येक वर्ष हिंदी साहित्य […]

भाषा-साहित्य

बचना – बढ़ना हिंदी का ….!!

मेरे छोटे से शहर में जब पहली बार माल खुला , तो शहरवासियों के लिए यह किसी अजूबे से कम नहीं था। क्योंकि यहां सब कुछ अप्रत्याशित औऱ अकल्पनीय था। इसमें पहुंचने पर लोगों को किसी सपनीली दुनिया में चले जाने का भान होता। बड़ी – बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के उत्पादों की चकाचौंध भरे विज्ञापन […]

भाषा-साहित्य

स्वप्न में कबीरदास जी से भेंट

बहुत दिनों बाद परीक्षा से मुक्ति मिली थी. सिर से मानो एक बोझ उतर गया था. परीक्षा के दिनों में तो न दिन का आराम, न रात में चैन. सुबह जल्दी उठो, रात को देर तक जागो. अब सोचा, खूब आराम से सोएंगे. बस लेटने की देर थी, कि निद्रा के रथ पर आरुढ़ होकर […]

भाषा-साहित्य

झिझक मिटे तो हिंदी बढ़े …!

एक बार मुझे एक ऐसे समारोह में जाना पड़ा, जहां जाने से मैं यह सोच कर कतरा रहा था कि वहां अंग्रेजी का बोलबाला होगा। सामान्यतः ऐसे माहौल में मैं सामंजस्य स्थापित नहीं कर पाता। लेकिन मन मारकर वहां पहुंचने पर मुझे अप्रत्याशित खुशी और सुखद आश्चर्य हुआ। क्योंकि ज्यादातर वक्ता भले ही अहिंदी भाषी […]

भाषा-साहित्य

आठवीं अनुसूची है या भारतीय रेल का अनारक्षित डिब्बा

भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में अभी तक 22 भाषाओं को शामिल किया गया है. इस सूची में 35 और भाषाओं को शामिल करने का प्रस्ताव है. भोजपुरी, अवधी, राजस्थानी, ब्रजभाषा, हरियाणवी, छतीसगढ़ी आदि लोकभाषाएँ प्रतीक्षा सूची में हैं. अभी तक हिंदी को ही उसका संविधान प्रदत्त अधिकार नहीं मिला और आठवीं अनुसूची में उपभाषाओं […]