नवीनतम लेख/रचना


  • कहानी : लौट आओ दिशा !

    कहानी : लौट आओ दिशा !

    “प्रभात….. प्रभात………….” माँ की आवाज तेज होती जा रही थी और प्रभात के कान पर जूँ तक नहीं रेंग रही थी। आज इस लड़के से बात करके रहूंगी, पता नहीं क्या समझता है अपने आप को । इधर...

  • नूर

    नूर

    वो हमारे दिल में रहते है हम उनकी नज़र में रहते है उन्हे भटकती लहरों सा तलाशते है इसलिए हम बीच मंझधार मे रहते है ” हिमालय की वादियों सा बेमिशाल हुश्न है उनका हम बादलों...


  • दीपोत्सव की शुभकामनाएँ

    दीवाली के इस मंगल अवसर पर आप सभी की मनोकामना पूर्ण हो खुशियाँ आपके कदम चूमे इसी मंगल कामना के साथ दीवाली की बधाई एवम शुभकामनाएँ ******************************************************************************** पर्व है ख़ुशी और उल्लास का अँधेरे की कालिमा...

  • शंकराचार्य निश्चलदास का बयान

    शंकराचार्य निश्चलदास का बयान

    शंकराचार्य निश्चलदास का बयान कि दलितों को मंदिर में प्रवेश की धर्मशास्त्रों में मनाही हैं हिन्दू समाज के किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति द्वारा दिया गया अत्यंत खेदपूर्ण बयान हैं। अगर हिन्दू समाज का कोई सबसे बड़ा शत्रु...

  • हम सभी

    हम सभी

    घड़ी ,,डायरी ,कुर्सी ,मेज मैं …..! कम्प्यूटर और पेन हम सभी एक साथ तुम्हारा इंतज़ार करते हैं जब तक तुम आती नहीं हो हम सब मिलकर तुम्हारी तस्वीर देखते हैं मन में आये भावों कों पन्ने...




कविता