कवितापद्य साहित्य

कटु सत्य

यह तो तय था

जिस दिन हम मिले थे

उससे बहुत पहले

यह निश्चित हो गया था

एक दिन हम मिलेंगे और

एक दिन तुम

मुझे छोड़ जाओगी

या मैं तुम्हे छोड़ जाउंगा ,

कौन किसको छोड़ जायगा

यह पता नहीं था l

 

इस कटु सत्य को

हम जानते थे ,

फिर भी हँसते थे,खेलते थे

साथ मिलकर

एक दुसरे का

सहारा बनकर आगे कदम बढाते थे l

जीवन के सुख-दुःख के

हर एक पल को

एहसास करने की

कोशिश करते थे ,

कभी लड़ते थे ,झगड़ते थे

फिर मिलकर बतियाते थे ,

पर हमें पता नहीं था

परछाईं की भांति

काल हमारे पीछे खड़े थे l

 

कुछ काम इस जनम में

मुझे दिया था ईश्वर ने

साझा करना था तुमसे

किया मैंने ,जितना बन पड़ा मुझसे l

इंसान गलतियों का पुतला है

गलतियाँ मैंने की

गलतियाँ तुमने की ,

दुखी हूँ मैं .

 

सज़ा केवल तुमको मिली l

इसे सज़ा कहूँ या

अनन्त यात्रा की तैयारी कहूँ ?

 

एक प्रश्न सदा उठता है मेरे मन में ,

क्या हम साथी रहे किसी और जनम में ?

यदि नहीं……

तो इतना लगाओ क्यों है ?

स्मृति साथ नहीं दे रही है

विछुडने के सोच से

आंसू नही रुक रहा है l

 

नहीं पता मुझे

आत्मा होती है या नहीं

अगर होती है ….

तो तुम्हारी भी होगी

उसका भी एक आशियाना होगा

वादा करता हूँ

मेंरी आत्मा,तुम्हारी आत्मा से

उस आशियाना में मिलेगी l

 

कालीपद ‘प्रसाद’

*कालीपद प्रसाद

जन्म ८ जुलाई १९४७ ,स्थान खुलना शिक्षा:– स्कूल :शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ,धर्मजयगड ,जिला रायगढ़, (छ .गढ़) l कालेज :(स्नातक ) –क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान,भोपाल ,( म,प्र.) एम .एस .सी (गणित )– जबलपुर विश्वविद्यालय,( म,प्र.) एम ए (अर्थ शास्त्र ) – गडवाल विश्वविद्यालय .श्रीनगर (उ.खण्ड) कार्यक्षेत्र - राष्ट्रीय भारतीय सैन्य कालेज ( आर .आई .एम ,सी ) देहरादून में अध्यापन | तत पश्चात केन्द्रीय विद्यालय संगठन में प्राचार्य के रूप में 18 वर्ष तक सेवारत रहा | प्राचार्य के रूप में सेवानिवृत्त हुआ | रचनात्मक कार्य : शैक्षणिक लेख केंद्रीय विद्यालय संगठन के पत्रिका में प्रकाशित हुए | २. “ Value Based Education” नाम से पुस्तक २००० में प्रकाशित हुई | कविता संग्रह का प्रथम संस्करण “काव्य सौरभ“ दिसम्बर २०१४ में प्रकाशित हुआ l "अँधेरे से उजाले की ओर " २०१६ प्रकाशित हुआ है | एक और कविता संग्रह ,एक उपन्यास प्रकाशन के लिए तैयार है !

4 thoughts on “कटु सत्य

  • विजय कुमार सिंघल

    वाह वाह !

    • कालीपद प्रसाद

      धन्यवाद विजय कुमार जी !

  • प्रीति दक्ष

    sundar bhaav..

    • कालीपद प्रसाद

      धन्यवाद प्रीति दक्ष जी !

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