कविता

इंसा रहे या न रहे !

गुरूर मत कर उन चीजों का
जो तेरे पास हैं
फक्र कर उन के लिए
जो तूने बाँट दी ….
नफरत बताने से नहीं
मोहब्बत लुटाने से
मिटती है |
ख़ुशी को किसी माध्यम
से बयां नहीं किया
जा सकता
ये तो वो आवो हवा है
जो स्वतः झलकती है
भावनाओं को शब्दों की
परिपाटी में बांधा नहीं
जा सकता
इन्हें सिर्फ मन के
गलियारों से महसूस
किया जा सकता है
प्यार के दो मीठे बोल
कल भी थे,
आज भी हैं और
कल भी रहेंगे
इंसा रहे या न रहे …..
के एम् भाई

के.एम. भाई

सामाजिक कार्यकर्त्ता सामाजिक मुद्दों पर व्यंग्यात्मक लेखन कई शीर्ष पत्रिकाओं में रचनाये प्रकाशित ( शुक्रवार, लमही, स्वतंत्र समाचार, दस्तक, न्यायिक आदि }| कानपुर, उत्तर प्रदेश सं. - 8756011826

One thought on “इंसा रहे या न रहे !

  • गुरमेल सिंह भमरा लंदन

    प्यार के दो मीठे बोल

    कल भी थे,

    आज भी हैं और

    कल भी रहेंगे

    इंसा रहे या न रहे ….. बहुत खूब .

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