कविता

होली आयी

होली आयी होली आयी
देख बच्चों की टोली आयी
रंग अबीर और पिचकारी
हाथो में सजा के आयी
हिलमिल सब खेल रहे हैं
रंग अबीर उडा रहे हैं
करते एक दूसरे को साराबोर भाई
आपस में मदमस्त होकर
होली गीत गा रहे हैं
रहता है इंतजार इसीका
कब आये फाल्गुन का महीना
रंगारंग मिजाज कर
खुब खेलाये होली ये महीना
नये नये कपड़े भी बनवायें
पुआ पकवान और मिठाई
सब मिलजुल कर ही खायें

— निवेदिता चतुर्वेदी

निवेदिता चतुर्वेदी

बी.एसी. शौक ---- लेखन पता --चेनारी ,सासाराम ,रोहतास ,बिहार , ८२११०४

2 thoughts on “होली आयी

  • विजय कुमार सिंघल

    अच्छा होली गीत !

    • निवेदिता चतुर्वेदी

      dhanybad sir

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