कविता

फूलों ने मेरा रास्ता रोका है

आज मुझे और किसी ने नहीं टोका है,
बस सुबह-सुबह फूलों ने मेरा रास्ता रोका है.

छोटी-सी क्यारी से खूबसूरती से निहारते हुए
डिप्लेडेनिआ के लाल चटख फूल
कह रहे थे मानो बुला-बुलाकर अपने पास
हम भी हैं उसी एक परमात्मा का खूबसूरत सृजन
हमें छोटा समझ मत जाना भूल.
तनिक हमारे पास भी आओ और रुको
हमसे हाथ मिलाकर दोस्ती करने के लिए तनिक झुको
झुकने वाला कभी छोटा नहीं होता है
वह तो सबसे महान होता है
फल का वृक्ष जब फलों से लदा-फदा होता है
वह बोझ या भार से नहीं विनम्रता से झुकता है
ताकि कोई उसके फल तक पहुंच सके
इसलिए तुम भी तनिक झुककर मुझ छोटे दोस्त से दोस्ती करो
मुझे खुश करो और अपने मन को भी खुशियों से भरो.

आज मुझे और किसी ने नहीं टोका है,
बस सुबह-सुबह फूलों ने मेरा रास्ता रोका है.

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244

6 thoughts on “फूलों ने मेरा रास्ता रोका है

  • अंजु गुप्ता

    bhut hi khoobsurat kavita

    • लीला तिवानी

      प्रिय सखी अंजु जी, आपके खूबसूरत नज़रिए को नमन. अति सुंदर व सार्थक प्रतिक्रिया के लिए आभार.

  • विजय कुमार सिंघल

    बहुत सुंदर कविता बहिन जी। फूलों के माध्यम से बहुत गहरी बात आपने कह दी !

    • लीला तिवानी

      प्रिय विजय भाई जी, जो फूलों ने हमें समझाया, वही हमने अभिव्यक्त कर दिया. अति सुंदर व सार्थक प्रतिक्रिया के लिए आभार.

  • लीला बहन, कविता बहुत खूबसूरत लगी . आप की पर्शंसा से फूल और भी खिल गए होंगे .

    आज मुझे और किसी ने नहीं टोका है,

    बस सुबह-सुबह फूलों ने मेरा रास्ता रोका है.

    • लीला तिवानी

      प्रिय गुरमैल भाई जी, फूल तो वैसे ही इतने आकर्षक थे, कि मैं बार-बार रुककर उनको देख रही थी. अति सुंदर व सार्थक प्रतिक्रिया के लिए आभार.

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