लघुकथा

सयानी

घर में जब किसी नव शिशु के आगमन की प्रतीक्षा होती है, तो माता-पिता के अतिरिक्त घर के सभी सदस्य नवजात शिशु के दर्शन करने को अत्यंत आतुर होते हैं, विशेषकर दादा-दादी की आतुरता की तो कोई सीमा ही नहीं होती है. दादी ने जब पहली बार अपनी नवजात पोती को देखा, तो जिज्ञासा से विस्फारित उसकी आंखें और आक्रोश से फड़कते हुए नथुने देखकर उसे सयानी के नाम से संबोधित किया. फिर क्या था, उसका नाम ही सयानी रख दिया गया. सयानी ने सचमुच हर क्षेत्र में अपने सयानेपन के झंडे गाड़ दिए थे. उसका विवाह भी सम्पन्न हो गया. नए घर के नए रिश्तों की प्रगाढ़ता बनाए रखने में उसने कोई कसर नहीं छोड़ी. पड़ोसियों से भी उसका ऐसा ही मधुर-प्रगाढ़ नाता था. एक बार उनके एक पड़ोसी उसको अपने घर की निगरानी करने के लिए घर की चाबियां सौंपकर विदेश चले गए. एक दिन सुबह-सुबह पड़ोसी के घर की लाइट जलती देखकर सयानी को कुछ अनिष्ट की आशंका हुई. उसने अपने पतिदेव को जगाकर पता करने को कहा. दोनों ने देखा, कि पड़ोसी के घर चोरी हो गई है और सामान बुरी तरह बिखरा हुआ था. पड़ोसी को सूचना देना अत्यंत आवश्यक था. सयानी ने बड़ी सधी हुई ई.मेल लिखकर उन्हें सूचना दी, ताकि अत्यधिक चिंता के कारण रस्ते में कुछ अनहोनी न हो जाए. उसने लिखा- ”यहां सब ठीक है, पर आपका तुरंत आना ज़रूरी है.” पड़ोसी को आने में दो दिन लग गए, तब तक सयानी और उसके पति पड़ोसी के घर की सुरक्षा करते रहे. पड़ोसी ने आकर आवश्यक कार्यवाही की. उन्होंने सयानी को सधी हुई ई.मेल लिखने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद कहा.

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244