बाल कविता

ज्यामितीय आकार

मेरी तो हैं चार भुजाएं,   
चार कोण हैं मैंने पाए,
चारों ही हैं एक बराबर,
नाम वर्ग है मेरा बच्चो.

 

मेरी भी हैं चार भुजाएं,  
चार कोण ही मैंने पाए,
आमने-सामने एक बराबर,
आयत नाम है मैंने पाया.

 

मेरी तो बस तीन भुजाएं,    
तीन कोण ही मैंने पाए,
उल्टा होता या मैं सीधा,
हरदम त्रिभुज ही कहलाता.

 

मैं तो गोल हूं लड्डू जैसा,    
या समझो तुम मुझको गेंद,
रोटी जैसा भले समझ लो,
वृत्त कहाता मुझे न खेद.

 

अब बूझो तुम एक पहेली,    
लंबा भी हूं और गोल भी,
नहीं बता पाए तो सुन लो,
नाम सिलिंडर मेरा सेठ.

 

अरे, कौन हो तुम पूछोगे?   
मैं खुद ही बतलाता हूं,
प्यार मुझे ममी का मिलता,
बेलन मैं कहलाता हूं.

लीला तिवानी

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244