गीत/नवगीत

होली के गीत

( होली के सुअवसर पर समूह में गाने योग्य एक गीत )

नीले पिले हरे गुलाबी और बैंगनी लाल
भर भर के मारो पिचकारी फेंको अबीर गुलाल
रंग डालो सभी के तन मन को …….२ …….

बरसे अम्बर भीगी धरती ‘ भीगी चुनरिया धानी
हो भीगी चुनरिया धानी
नेह छलक उठते प्रिय जन विरहन के नैना पानी
हो विरहन के नैना पानी
नेह लगाये सजनी ढूंढे …..हो ….
नेह लगाये सजनी ढूंढे अपने सजन को
रंग डालो सभी के तन मन को ……….२

जाति पांति और उंच नीच के सारे झगड़े छोडो
हो सारे झगड़े छोडो
दुर रहे न कोई जग में दिल से दिल को जोड़ो
हो दिल से दिल को जोड़ो
नजर लगा पाए ना कोई …..हो …
नजर लगा पाए ना कोई अपने चमन को
रंग डालो सभी के तन मन को ………….२

बरसे बादल भीगे आँचल उड़े चुनरिया धानी
हो उड़े चुनरिया धानी
सहमा बचपन ‘ डरा बुढ़ापा इठलाती है जवानी
हो इठलाती है जवानी
भेद रहे ना इक रंग रंग दो…हो ….
भेद रहे ना इक रंग रंग दो अपने वतन को
रंग डालो सभी के तन मन को ………….२

तरह तरह के रंग लगाये मन ही मन हर्षाये
हो मन ही मन हर्षाये
रंग रहे ये चार दिना फिर पानी से छुट जाये
हां ये पानी से छुट जाये
रंग प्रेम का लगा के देखो ….हो …..
रंग प्रेम का लगा के देखो बदले जीवन को
रंग डालो सभी के तन मन को ……….२

होली के सुअवसर पर सभी देशवासियों ‘ पाठकों व शुभचिंतकों को होली की हार्दिक शुभकामनाएं  ।

*राजकुमार कांदु

मुंबई के नजदीक मेरी रिहाइश । लेखन मेरे अंतर्मन की फरमाइश ।