कविता

जोकर 

जो कर के गमो को अपने अंदर दफ़न
लाए चेहरे पर हंसी वह..जोकर
जो कर लेता दर्द से दोस्ती
हर दर्द अपना छिपाए वह..जोकर
जो कर लेता हालात से समझौता
और हंसी का ठहाका लगाए वह..जोकर
जो कर सके तुम्हारे ग़मों को हल्का
तुम्हें कुछ पल जो हंसाए वह..जोकर
जो कर के अपने आंसुओं को दफ़न
रहे चेहरे पर मुखौटा लगाए वह..जोकर
जो कर के अलविदा इस दुनिया से
एक याद बन बार बार आए वह..जोकर
आशीष शर्मा “अमृत” जयपुर राजस्थान

आशीष शर्मा 'अमृत'

जयपुर, राजस्थान