कविता

जल्द से जल्द जाओ

बस अब बहुत हुआ ,
बहुत रुक लिए तुम,
अब जाओ जल्द से,
किसी को नहीं है,
जरूरत तुम्हारी यहाँ,

बहुत कुछ ले लिया,
अब क्या लेना है और
बस करो तुम अब,
खून के आंसू तुमने,
सभी को रुलाया है,

देखो तो तुम खुद ही,
जब से आये हो तभी से,
एक से एक कांड कर रहे हो,
कितने अपनो को जुदा किया,
अब भी मन न भरा तुमने ,

हाँ एक बात सुनो ,
तुमने लिया बहुत है पर,
दिया भी है कुछ
कीमत देने की तुमने ली,
वो खुशी दी तुमने,
जिसके लिए तरस रहे सभी थे।
खुशी को सहेज न सके थे ,
तुमने कीमत उसकी ली बड़ी,

बस बहुत हो गया तुम जाओ ,
जाते हुए सारे गम ले जाओ,
आने वाले के संग सिर्फ ,
थोड़ी खुशी अपार भेजना ,
उन खुशियों की कीमत ,
जो तुमने ली हमसे ।

जाओ 2019 अब जाओ जल्दी,
भेजो 2020 को हमारी खुशी के संग।।।
अब न ठहरो एक पल को भी,
जल्द से जल्द जाओ तुम ।
विनती है यह हमारी।।

सारिका औदिच्य

*डॉ. सारिका रावल औदिच्य

पिता का नाम ---- विनोद कुमार रावल जन्म स्थान --- उदयपुर राजस्थान शिक्षा----- 1 M. A. समाजशास्त्र 2 मास्टर डिप्लोमा कोर्स आर्किटेक्चर और इंटेरीर डिजाइन। 3 डिप्लोमा वास्तु शास्त्र 4 वाचस्पति वास्तु शास्त्र में चल रही है। 5 लेखन मेरा शोकियाँ है कभी लिखती हूँ कभी नहीं । बहुत सी पत्रिका, पेपर , किताब में कहानी कविता को जगह मिल गई है ।