ब्लॉग/परिचर्चा

रविंदर भाई: शतकीय ब्लॉग की बधाई

रवि भाई,
नमस्कार,
आज आपका 100 वां ब्लॉग गुरु नानक जी का प्रकाश पर्व भाग- 26 प्रकाशित हुआ. सच पूछिए, तो 26 दिन का यह अनवरत सत्संग हमारे लिए बहुत महत्त्वपूर्ण, आनंददाई और रूहानी रहा.
सत्संग की आपकी यह परंपरा नई नहीं है. सच पूछिए तो March 16, 2017 से हीआपके ब्लॉग हमें सत्संग से ही जोड़े रखने में सक्षम रहे. आपकी आत्मकथा उसकी कहानी 6 भागों में प्रकाशित हुई. हमारा जीवन उसकी कहानी ही है, यह आपने हमें सिखाया-समझाया. उसकी कहानी में आपने अपने उन अद्भुत अनुभवों को वर्णित किया है, जिनसे आपका जीवन संचालित हुआ. इसको पढ़कर हमें लगने लगा- वास्तव में हमारा जीवन भी उसकी कहानी ही है. जो वो करवाता है, वही हम कठपुतली की तरह करते हैं. करन करावनहार एको स्वामी. आपके साथ-साथ हमने भी अनोखे अनुभव किए.
भोजन का महत्व समझें, अंधेर नगरी मुंबई, आदि अनेक अनमोल लेखों के बाद फिर आपने ‘संतों के संत बाबूजी महाराज’ से हमारा परिचय करवाया. यह भी एक सत्संग श्रंखला रही. ‘सिख गुरुओं की शहीदी’ भी आपकी शानदार सत्संग श्रंखला रही. तीन प्रश्न और गुरु नानक जी के उत्तर, कुमार विश्वास और सिख चुटकुले जैसे विविध विषयी ब्लॉग के साथ विचारात्मक ब्लॉग ‘कन्या पूजन किसने किया?’ ने हमारे ज्ञान-चक्षु खोल दिए. ‘मेरी तीर्थ यात्रा भाग – 2’ फिर एक यात्रा-संस्मरण भी रहा और सत्संग श्रंखला भी. इसी से प्रेरित होकर इंद्रेश भाई भी यात्रा पर निकल गए, वह भी साहसिक यात्रा.
अपना ब्लॉग की बात करने से पहले बात जय विजय की. राजकुमार भाई की तरह आपने भी पहले जय विजय में कलम-आजमाइश की. आपका सबसे पहला ब्लॉग जय विजय में था- ”क्या हमें आजादी मिल गयी ?”, जो January 30, 2017 को आया. इसमें गुलामी की मानसिकता से मुक्त होने की कामना की गई है.
अपना ब्लॉग पर आते ही आपसे हमारा संपर्क ही नहीं घनिष्ठ संपर्क रहा. तुरंत ही आपने एक ब्लॉग-
जन्मदिन ; बधाई सबकी : मश्विरा मेरा
लिखा, जो अपने आप में अनूठा था. आपकी लघु कथा: चारा अद्भुत लघुकथा रही. आपने भगवान राम, हनुमान के साथ ‘शादी के लडडू’ पर भी अपनी कलम चलाई.
‘पता ही न चला’
कब आप अपना ब्लॉग पर आए, कब आपने 100 ब्लॉग लिखे, ‘पता ही न चला’.

गुरमेहर के बाद, हमने देखा गुजरा हुआ ज़माना, सच्ची ख़ुशी, बालाकोट एयर स्ट्राइक और मोदी जी, देश की सच्चाई आपके बहुचर्चित ब्लॉग रहे.
एक बार फिर बात आपकी आध्यात्मिकता की. हमने ब्लॉग ‘संयोग पर संयोग-7’ में आपके लिए लिखा था-
”रविंदर भाई, एक जाने-पहचाने आध्यात्मिक व्यक्तित्व का नाम है, जो सभी के दोस्त हैं. उनसे मुलाकात होना भी एक अद्भुत संयोग है, जिसने हमारे आध्यात्मिकता के दीप को और भी प्रज्वलित कर दिया.”

आज हम इतना ही लिखकर आपको एक बार फिर ब्लॉग शतक की बधाई देते हुए आपके लेखन के शिखर की ओर बढ़ते जाने की कामना भी करते हैं. साथ ही ‘पुराने साल को विदाई, नए साल की बधाई.’

अब आपकी बात कुछ और साथियों की कलम से-

लीला बहन, यह जानकर अत्यंत हर्ष हुआ, कि आज रविंदर भाई का 100 वां ब्लॉग गुरु नानक जी का प्रकाश पर्व भाग- 26 प्रकाशित हुआ है. मैंने गुरु नानक जी का प्रकाश पर्व भाग- 25 पढ़ा. रविंदर भाई गुणी-ज्ञानी हैं. इतनी मेहनत से पुरातन ग्रंथों को पढ़कर इन रूहानी साखियों से जनता को अवगत करवाकर वे महान काम कर रहे हैं. हमारी शुभकामनाएं रविंदर भाई के साथ हैं. इसी तरह अनेक शतक बनाते रहें. गुरमेल भमरा

आदरणीय लीला बहन! सादर नमन! आपको व इस मंच पर उपस्थित सभी पाठकों व ब्लॉगरों को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ! रविंदर भाई की शतकीय रचना के लिए My heartiest congratulations to respected Ravindr ji.
इंद्रेश उनियाल

रविंदर जी, आप को बहुत-बहुत बधाई,आप का सौवाँ ब्लॉग ‘भाग- 26’ आज प्रकाशित हो रगया है. गुरु की करनी की ओर ध्यान देना शिष्य का कर्तव्य नहीं, शिष्य का कर्तव्य तो गुरु की आज्ञा मानना है. ज्ञान, दर्शन और चरित्रवान व्यक्ति जब गुरुचरणों में समर्पण भावके साथ श्रद्धावनत होगा, तब ही वह मोक्षमार्ग पर अग्रसर हो पायेगा. गुरु नानक जी का प्रकाश पर्व भाग- 26 जीवन को आलोकित करते परम पावनप्रकाश पुंज से सब का जीवन आनंदित, उल्लसित हो यही मंगलकामना. अध्यात्मिक ज्ञान से रूबरु कराती आप की अनमोल रचनाओं के लिये बहुत बहुत धन्यवाद.
चंचल जैन

मन को छूने वाले प्रसंग और हर प्रसंग में गुरु जी की शिक्षाएं हैं. बड़ी सरल वाणी में नानक देव जी इंसानों को सच्चाई से जोड़ते थे. आपने अति उत्तम लेखन कर श्री नानक देव जी की महानता से हमें परिचित कराया है. मैंने गुरु जी की छुट-पुट कथाएँ सुनी थीं, शतकीय ब्लॉग गुरु नानक जी का प्रकाश पर्व भाग- 26 के लिए आपका हृदय से आभार.
शोभा भारद्वाज

आदरणीय रविन्दर जी, सादर प्रणाम. शिवजी की जटा से जिस प्रकार भागीरथी गंगा के रूप में अवतरित हुई उसी प्रकार आपकी कलम से ज्ञान गंगा अवतरित हो चुकी है जिसकी धारा अविरल बह रही है और ज्ञान लाभ करा रही है. यह हमारा सौभाग्य है. शतकीय ब्लॉग गुरु नानक जी का प्रकाश पर्व भाग- 26 के लिए आपका हृदय से आभार.
सुदर्शन खन्ना

धन्यवाद रविंदर जी! आपने प्रकाश पर्व के उपलक्ष में यह जो ज्ञान-गंगा बहाई है उसका लाभ हम सब ले रहे है! नानकदेव जी की अमृततुल्य वाणी में जादू है, तभी हम आपके अगले पड़ाव का बेसब्री से इंतजार करते है! नानकदेव जी के शब्द…अतिथि की सेवा करो, गरीब की पालना करो, ईश्वर स्मरण करो, तब तुम सब का कल्याण होगा. यह कालातीत है! धन्यवाद रविंदर जी! शतकीय ब्लॉग गुरु नानक जी का प्रकाश पर्व भाग- 26 के लिए आपका हृदय से आभार.
कुसुम सुराणा

आदरणीय दादा सादर प्रणाम, समयाभाव के चलते अपना ब्लॉग पर नहीं आ पा रहा हूँ. मैंने गुरु नानक जी का प्रकाश पर्व भाग- 21 भी पढ़ा था, पर प्रतिक्रिया नहीं लिख पाया. मैं ईश्वर से बस यही प्रार्थना करूँगा कि गुरु नानक जी के विषय में अद्भुत जानकारियों से भरा गुरु नानक जी का प्रकाश पर्व हमेशा ही प्रकाशित रहे और इसका अलौकिक प्रकाश मानवीय गुणों की छटा यूँ ही बिखेरता रहे. आपको अनेकानेक धन्यवाद सहित नमन🙏🙏🙏🙏🙏 शतकीय ब्लॉग गुरु नानक जी का प्रकाश पर्व भाग- 26 के लिए आपका हृदय से आभार.
गौरव द्विवेदी

रवि भाई, आपके शतकीय ब्लॉग के साथ एक और 101 वां ब्लॉग भी आ गया है. शतकीय और सवाया, दोनों ब्लॉग्स के लिए हार्दिक बधाइयां व शुभकामनाएं. आपकी लेखनी की यह अनुपम ज्ञान-गंगा इसी तरह प्रवाहित होती रहे, इसीके साथ आपको नए साल की भी हार्दिक बधाइयां व शुभकामनाएं.
हम हैं
लीला तिवानी के साथ जय विजय और अपना ब्लॉग के सब साथी

 

रविंदर सूदन की जय विजय साइट
https://jayvijay.co/author/ravindersudan/
रविंदर भाई की अपना ब्लॉग की साइट है-
https://readerblogs.navbharattimes.indiatimes.com/author/ravisudanyahoo-com/
कृपया इस ब्लॉग को भी पढ़ें-
संयोग पर संयोग-7

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244

One thought on “रविंदर भाई: शतकीय ब्लॉग की बधाई

  • लीला तिवानी

    आध्यात्मिकता के प्रणेता रविंदर भाई, एक बार फिर ब्लॉग शतक की बधाई देते हुए आपके लेखन के शिखर की ओर बढ़ते जाने की कामना भी करते हैं. साथ ही ‘पुराने साल को विदाई, नए साल की बधाई.’

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