गीत/नवगीत

कण-कण में बस तुम दिखती हो

तुम्हें प्रेम हम करते कितना? इसका कोई माप नहीं है।

कण-कण में बस तुम दिखती हो, नाम का केवल जाप नहीं है।।

चाह नहीं है, हम तुम्हें पाएं।

हम तो गीत तुम्हारे गाएं।

हम तो तुम्हारे हर प्रेमी को,

अपना समझें गले लगाएं।

प्रेम वियोग है, जीवन पीड़ा, तुम हो पश्चाताप नहीं है।

कण-कण में बस तुम दिखती हो, नाम का केवल जाप नहीं है।।

नयन भले ही देख न पाएं।

अनुभूति से हम हरषाएं।

बाग-बाग हम हो जाते हैं,

समाचार तुम्हारे, हम सुन पाएं।

पीड़ा कितनी भी मिल जाए, हमको कोई ताप नहीं है।

कण-कण में बस तुम दिखती हो, नाम का केवल जाप नहीं है।।

स्वर सुनने को कान ये तरसे।

नयनों से भी अश्रु  बरसे।

जहाँ हो तुम, आनंदित हो बस,

यही जानकर हियरा हरषे।

यादों के सहारे हम जी लेंगे, भले ही तुम्हारा साथ नहीं है।

कण-कण में बस तुम दिखती हो, नाम का केवल जाप नहीं है।।

डॉ. संतोष गौड़ राष्ट्रप्रेमी

जवाहर नवोदय विद्यालय, मुरादाबाद , में प्राचार्य के रूप में कार्यरत। दस पुस्तकें प्रकाशित। rashtrapremi.com, www.rashtrapremi.in मेरी ई-बुक चिंता छोड़ो-सुख से नाता जोड़ो शिक्षक बनें-जग गढ़ें(करियर केन्द्रित मार्गदर्शिका) आधुनिक संदर्भ में(निबन्ध संग्रह) पापा, मैं तुम्हारे पास आऊंगा प्रेरणा से पराजिता तक(कहानी संग्रह) सफ़लता का राज़ समय की एजेंसी दोहा सहस्रावली(1111 दोहे) बता देंगे जमाने को(काव्य संग्रह) मौत से जिजीविषा तक(काव्य संग्रह) समर्पण(काव्य संग्रह)