कविता

नमन वीर जवानों को

मेरा नमन है उस हर मांँ को
ऐसे वीरों को जन्मा।
और भेज दिया सीमा पर
जा देश की रक्षा करना।
कैसे हृदय के टुकड़े के
प्राणों की परवाह किए बिना,
कर दिया समर्पित माँ भारती को
सुख दुःख की परवाह किए बिना ।

मेरा नमन है उस हर पत्नी को
जो हर रोज माँग मे भरकर
सिंदूर रखा करती थी।
कब मिट जाए यह लाली,
भयभीत हुआ करती थी।
फिर भी कहती थी जाओ,
जाओ मेरे प्राणों के प्यारे।
डटकर लड़ना, दुश्मन के
कर देना वारे- न्यारे।

मेरा नमन है उस हर पिता को,
उस पिता का दर्द क्या जानो
पुत्र है जिसने खोया।
करता है गर्व निज सुत पर,
छुप छुपकर कितना रोया।

मेरा नमन है उस हर बहन को
जो चीख रही बिलखाती
वह धन्य है हर एक बहना।
जिनका हर राखी पर
भाई से यही था कहना।
तुम देश की रक्षा करना,
दुश्मन से कभी न डरना।

मेरा नमन है उस हर शहीद को
जो परिवार की सब खुशियों को
कुर्बान किया करता था।
भूखा- प्यासा सर्दी में,
हर रोज मरा करता था।

मेरा नमन है इस भारत देश को
जो सड़कों पर उतरा है,
शहीदों को न्याय दिलाने ।
अब जल्द लगानी होगी
दुश्मन की अक्ल ठिकाने।

— सारिका “जागृति”

डॉ. सारिका ठाकुर "जागृति"

ग्वालियर (म.प्र)