लघुकथा

हमीद का बकरीद

जब से बिहार के लाखों लोग नियोजित भात, नियोजित दाल और नियोजित पापड़ खाने लगे हैं, उनका वेतन अबतक किसी भी माह समय पर नहीं मिल सका है ! अगर संयुक्त माहों के वेतन एकमुश्त दिए भी गए हैं, तो ऐसे नियोजित प्राणियों को विलम्बित वेतन से अर्जित ब्याजराशि भी उन्हें प्राप्त नहीं होते हैं। यह ब्याज की राशि सरकारी अधिकारियों के खाते में ही रह जाते हैं और ब्याज की राशि से नियोजितों के आगामी वेतन का भुगतान होते हैं ! सरकार बड़े मास्टरमाइंड से लेश हैं! जब-जब ‘ईद’ या ‘बकरीद’ आता है, हामिद और उनका चिमटा एक यक्ष प्रश्न लेकर आता है! तब के धनी मुस्लिम बच्चे गरीब ‘हामिद’ से कोई दयाभाव नहीं रख पाते हैं, किन्तु बहुत बार ललचाये ‘हामिद’ स्वाभिमान तले उन धनी बच्चों के बड़े पदधारक खिलौने को चिमटा दिखाए रखते हैं !

डॉ. सदानंद पॉल

एम.ए. (त्रय), नेट उत्तीर्ण (यूजीसी), जे.आर.एफ. (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार), विद्यावाचस्पति (विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ, भागलपुर), अमेरिकन मैथमेटिकल सोसाइटी के प्रशंसित पत्र प्राप्तकर्त्ता. गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स होल्डर, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, RHR-UK, तेलुगु बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स इत्यादि में वर्ल्ड/नेशनल 300+ रिकॉर्ड्स दर्ज. राष्ट्रपति के प्रसंगश: 'नेशनल अवार्ड' प्राप्तकर्त्ता. पुस्तक- गणित डायरी, पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद, लव इन डार्विन सहित 12,000+ रचनाएँ और संपादक के नाम पत्र प्रकाशित. गणित पहेली- सदानंदकु सुडोकु, अटकू, KP10, अभाज्य संख्याओं के सटीक सूत्र इत्यादि के अन्वेषक, भारत के सबसे युवा समाचार पत्र संपादक. 500+ सरकारी स्तर की परीक्षाओं में अर्हताधारक, पद्म अवार्ड के लिए सर्वाधिक बार नामांकित. कई जनजागरूकता मुहिम में भागीदारी.