गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

बैकुण्ठ का इतिहास बनाए कृष्ण सुदामा की यारी।
राजा, रंक के पैर दबाए कृष्ण सुदामा की यारी।
इच्छा शक्ति का सद्पयोग जीवन की अनुपम कुन्जी,
गीता का संदेश सुनाए कृष्ण सुदामा की यारी।
ज्यों अम्बर में फैली चक्षु सूर्य के दर्शन करती है,
ओम के पुल से आए-जाए कृष्ण सुदामा की यारी।
जाति-पाति रंग रूप भिन्नता अविनाशी कुकर्म,
सबको अच्छा कर्म सिखाए कृष्ण सुदामा की यारी।
एकाग्र बुद्धि से प्रत्यक्ष कर्म फलों की स्वतंत्रता,
मानव का अहंकार मिटाए कृष्ण सुदामा की यारी।
मंगलमय प्रमोद भरी सद्भाव पूर्ण प्रेरणाए,
शक्ति के मायने समझाए कृष्ण सुदामा की यारी।
स्वर्गलोक तथा पृथ्वीलोक का यश यहां मिलता है,
गिरते को भी गले लगाए कृष्ण सुदामा की यारी।
अखण्ड सत्त्य आनंदनिधि परमात्मा की है प्राप्ति,
हृदय से अभिवादन गाए कृष्ण सुदामा की यारी।
निर्बल, निर्धन, निश्छल, शासक, माझी आए जाए है,
सर्व वर्ण का सेतु बनाए कृष्ण सुदामा की यारी।
मानवता में शिष्टाचार बुलंदी को छू जाए है,
तब सरह्द की पंक्ति मिटाए कृष्ण सुदामा की यारी।
शान्ति, समता, निर्भयता से परमानंद का प्रकाश,
मैत्राी पूर्ण बिम्ब बनाए कृष्ण सुदामा की यारी।
शाम ढले सबसे पहले उदय होते हैं दो तारे,
ऐसे याद हमेशा आए कृष्ण सुदामा की यारी।
‘बालम’ जिसमें षोठशोपचार की सुरभि फैल रही,
पूजा वाले थाल सजाए कृष्ण सुदामा की यारी।

— बलविन्दर ‘बालम’

बलविन्दर ‘बालम’

ओंकार नगर, गुरदासपुर (पंजाब) मो. 98156 25409