लघुकथा

महिला दिवस की गूँज!

चिंकी अपने बच्चे को हाथों के पालने में सुला रही थी। अचानक खिलखिलाने आवाज आई। उसके पति रोहित के साथ कोई नवयौवना किशोरी शरमाती आ रही थी। हाथों में हाथ धरे, महकती, दहकती, बहकती नयी ब्याहता लज्जो। रोहित दुबारा किसी किशोरी को फाँस लाया हैं, जैसे वह खुद उसकी शिकार हुई थी। लेकिन अब वह चुप नही बैठेगी।
चिल्ला चिल्ला कर चिंकी ने जमीन आसमान सिर पर उठा लिया। रोहित सोच रहा था कि शोषिता चिंकी क्या कर लेगी? कठपुतली सा नाच नचाऊंगा। थोडी देर चिल्लाएगी फिर खुद ही शांत हो जाएगी। चिंकी नयी ब्याहता को घूर घूरकर देख रही थी। वह अपने अतीत में खोई थी। बीते साल इसी तरह उसे भी रोहित गांव से ले आया था। शहर जाने के रोमांच में वह अपना भला-बुरा सोच नहीं पायी थी। चिकनी-चुपड़ी बातों में अपना घर-द्वार सब कुछ भूल गयी थी। दिल्ली आकर उसने अपना असली चेहरा दिखाया था। लोगों के घर पर काम करने के लिए उसे बाध्य किया था। वह अपने साथ हुई ठगी का किससे जिक्र करे? गांव वाले भी अब अजनबी बन जायेंगे, भागकर जो आई हैं वह रोहित के साथ।
नयी ब्याहता लज्जो सारा माजरा समझ गयी थी। उसने नन्हे को गोद में उठा लिया। वह पलभर निःशब्द, अपलक चिंकी को देखती रही। आंखों ही आंखों में कुछ बातें हुई।
शोर सुनकर आसपास वाले बाहर आ गए। “चिंकी, क्यों चिल्ला रही हो?”
”दीदी,” अपने नन्हे की तरफ इशारा करके बोली, “ब्याहता हूँ दीदी मैं इसकी। यह बच्चा इसका ही हैं।”
“कौन जाने?” रोमियो बने रोहित की झिड़की से वह तिलमिलाई। जोरदार तमाचा जड़ते हुए बोली, “याद आ गया? या याद दिला दूँ?” रणचंडी सी लग रही थी चिंकी। अधमरा-सा रोहित उसके पैरों में गिर पड़ा। कहीं दूर महिला सशक्तिकरण दिवस की गूंज सुनाई दे रही थी।

— चंचल जैन

*चंचल जैन

मुलुंड,मुंबई ४०००७८

3 thoughts on “महिला दिवस की गूँज!

  • *चंचल जैन

    आदरणीय, सादर नमन। “चिंकी” के साथ हुई ठगी की यह कहानी हैं। रोहित गांव से ब्याहकर नयी नयी लड़कियों को फुसलाकर ले आता हैं। यहां आकर मजबूर करता हैं उन्हें औरों के काम करने के लिए मजबूर करता हैं। चिंकी का छोटा बच्चा हैं। रोहित जब नयी ब्याहता को ले आया, चिंकी तिलमिलाई। लेकिन नयी ब्याहता चिंकी का साथ देती हैं और दोनों मिलकर रोहित को दिन में तारे दिख देती हैं। नारी केवल भोग्या नहीं। रोहित को दोनों मिलकर समझाती हैं। नारी शक्ति का यही उद्देश्य हैं। पीड़िता को न्याय मिले। बच्चे को पिता का प्यार मिले। महिलाएं न्याय के लिए एक हो जाये।

    • डाॅ विजय कुमार सिंघल

      नयी ब्याहता का कोई नाम रखना था और यह बात स्पष्ट लिखनी थी कि रोहित पहले से चिंकी के साथ विवाहित था और उसका एक बच्चा भी था।

  • डाॅ विजय कुमार सिंघल

    लघुकथा स्पष्ट नहीं है कि वास्तव में हुआ क्या था? दो दो बार पढ़ने पर भी बात समझ में नहीं आयी।

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