पद्य साहित्यहाइकु/सेदोका

दुलारी होली

1.
दे गया दग़ा
रंगों का ये मौसम,
मन है कोरा।

2.
गुज़रा छू के
कर अठखेलियाँ
मौसमी-रंग।

3.
होली आई
मन ने दग़ा किया
उसे भगाया।

4.
दुलारी होली
मेरे दुःख छुपाई
देती बधाई।

5.
सादा-सा मन
होली से मिलकर
बना रंगीला।

6.
होलिका-दिन
होलिका जल मरी
कमाके पुण्य।

7.
फगुआ मन
जी में उठे हिलोर
मचाए शोर।

8.
छाये उमंग
खिलखिलाते रंग
बसन्ती मन।

9.
ख़ूब बरसे
ज्यों दरोगा की लाठी
रंग-अबीर।

10.
बिन रँगे ही
मन हुआ बसन्ती
रुत है प्यारी।

11.
कैसी ये होली
रिश्ते नाते छिटके
अकेला मन।

12.
छुपके आई
कुंडी खटखटाई
होली भौजाई।

13.
माई न बाबू
मन कैसे हो क़ाबू,
अबकी होली।

14.
अबकी साल
मन हो गया जोगी,
लौट जा होली!

15.
पी ली है भाँग
लड़खड़ाती होली
धप्प से गिरी।

– जेन्नी शबनम (18. 3. 2022)
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