साझा संसार (गद्य-विविधा) का लोकार्पण
दिनांक 29 मार्च 2026 को ‘पेड़ों की छाँव तले फाउण्डेशन’ के तहत प्रथम एन सी आर लिटरेरी फ़ेस्टिवल, 2026 का
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Read Moreमानव तथा मौसम का स्वभाव एक-सा होता है। कब, क्या, कैसे, कौन, कहाँ, क्यों परिवर्तित हो जाए, पता ही नहीं चलता।
Read Moreअंतरिक्ष जिसे अँग्रेज़ी में स्पेस (space) कहते हैं, मुझे सदैव बड़ा ही रहस्यमय लगता है। जब मैं छोटी थी तब
Read Moreबिहार के भागलपुर में एक शिक्षक परिवार में मेरा जन्म हुआ। मेरे पिता भागलपुर विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर थे, जिनका देहान्त
Read Moreबापू के तीनों बन्दर सालों-साल मुझमें जीते रहे मेरे आँसू तो नहीं माँगे मेरा लहू पीते रहे फिर भी मैंने
Read More1. मृत्यु सत्य है बेख़बर नहीं हैं दिल रोता है। 2. शाश्वत आत्मा अपनों का बिछोह रोती है आत्मा। 3.
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