मुक्तक/दोहा

मुक्तक

काल के गर्त में खो जायेगा, जो समय के साथ चल सका ना,
नाम लेने वाला न मिलेगा, वक़्त के साथ परिवर्तन यदि किया ना।
है ज़रूरी सामन्जस्य बनाकर चलें, नित नये रास्ते मन्जिलें गढ़ें,
प्राचीनता का समागम करें, नवीनता को भी जीवन में तजे ना।
— अ कीर्ति वर्द्धन