कविता

दर्द ज़िन्दगी के

दर्द ज़िन्दगी के जैसे – दिखाए नहीं दिखते
ग़म ज़िन्दगी के भी – छुपाए नहीं छुपते
मैहफ़िल में मुस्कराना- पडता है लबों से
अफ़साने प्यार के कभी भी – भुलाए नहीं भूलते
ज़रूरत दवा की होती – नही है दिल के मरीज़ को
मुआमले दिलों के – सुलझाए नहीं हैं सुलझते
एक पैमाना ही बदल देता है – मैख़ाने के माहोल को
मिल बैठकर पीने वाले – आपस में नहीं उलझते
ज़िन्दगी तो सिलसला है – जज़्बातों का दुनया में
रोज़ ओ शब यूं ही तो – अज़ाब बन नहीं जाते
दिल दे दिया हम ने तो – मांगा जिसने भी हम से
तलाश में किसी की भी हम – यूं ही चल नहीं देते
लगाना नुक्तों का ज़रूरी है – लफ़्ज़ों की तैहरीर में मदन
लफ़्ज़ों की तैहरीर से शेयर – यूं ही तो बन नहीं जाते
इन्तेख़ाब अच्छे लफ़्ज़ों का – ज़रूरी है ग़ज़ल के लिये
अच्छी ग़ज़ल शायर यूं ही – तो लिख नहीं देते

मदन लाल

Cdr. Madan Lal Sehmbi NM. VSM. IN (Retd) I retired from INDIAN NAVY in year 1983 after 32 years as COMMANDER. I have not learned HINDI in school. During the years I learned on my own and polished in last 18 months on my own without ant help when demand to write in HINDI grew from from my readers. Earlier I used to write in Romanised English , I therefore make mistakes which I am correcting on daily basis.. Similarly Computor I have learned all by my self. 10 years back when I finally quit ENGINEERING I was a very good Engineer. I I purchased A laptop & started making blunders and so on. Today I know what I know. I have been now writing in HINDI from SEPTEMBER 2019 on every day on FACEBOOK with repitition I write in URDU in my note books Four note books full C 403, Siddhi Apts. Vasant Nagari 2, Vasai (E) 401208 Contact no. +919890132570