मुक्तक/दोहा

पेड़ के दोहे

पेड़ काटने चल दिए ,देखो मूरखराज ,
छाँह राह में खोजते ,आवत नाही लाज।

दस पेड़ों को काट के ,लगा रहे इक पौध ,
उनके प्रकृति प्रेम पे ,खुश है मनुज अबोध।

पेड़ काट रहे हर तरफ ,चिड़िया करती शोर ,
कहाँ रहेंगे हम बता ,ओ मानव घनघोर।

पेड़ काटना पाप है ,सुन ले मनुज सुजान ,
बड़े पुण्य का काम है ,वृक्षारोपण जान।

नीम पेड़ को जानिए ,कुदरत का वरदान ,
शुद्ध देके सदा ,करता रोग निदान।

— महेंद्र कुमार वर्मा

महेंद्र कुमार वर्मा

द्वारा जतिन वर्मा E 1---1103 रोहन अभिलाषा लोहेगांव ,वाघोली रोड ,वाघोली वाघेश्वरी मंदिर के पास पुणे [महाराष्ट्र] पिन --412207 मोबाइल नंबर --9893836328