गीत/नवगीत

भूल न जाना हे मानव

गौरव मय इतिहास हमारा,
भूल न जाना हे मानव |
मर्यादाएं मत बिसराना,
सच अपनाना हे मानव |

पूजनीय हो कर्म तुम्हारे,
जीवन शैली हो अनुकूल|
मर्यादित हो अनुशासित हो,
धर्माचरण न हो प्रतिकूल |
दान दया ममता समता गुण,
मत बिसराना हे मानव |
गौरव मय……..

राणा वीर शिवा के बेटे,
हम अतुल्य बलशाली हैं |
परशुराम सुखधाम राम के,
हम वंशज अधिकारी हैं |
तपना ही अपना जीवन है,
नहीं भुलाना हे मानव |
गौरव मय………..

भारत की रजकण चंदन है,
हर बालक है राम यहाँ |
हर बाला देवी की प्रतिमा,
उर में प्यार दुलार यहां |
सृष्टि समुन्नत देश बनाना,
विजई होना हे मानव |
गौरव मय इतिहास हमारा,
भूल न जाना हे मानव |
मंजूषा श्रीवास्तव ‘मृदुल’

*मंजूषा श्रीवास्तव

शिक्षा : एम. ए (हिन्दी) बी .एड पति : श्री लवलेश कुमार श्रीवास्तव साहित्यिक उपलब्धि : उड़ान (साझा संग्रह), संदल सुगंध (साझा काव्य संग्रह ), गज़ल गंगा (साझा संग्रह ) रेवान्त (त्रैमासिक पत्रिका) नवभारत टाइम्स , स्वतंत्र भारत , नवजीवन इत्यादि समाचार पत्रों में रचनाओं प्रकाशित पता : 12/75 इंदिरा नगर , लखनऊ (यू. पी ) पिन कोड - 226016