क्षणिका

प्रच्छन्न-सी उम्मीद

तू ही मेरी इबादत,
तू ही मेरी इनायत,
एक प्रच्छन्न-सी उम्मीद है,
तेरे मिलने की,
न भी मिल सके तो,
न कोई गिला-शिकवा,
न कोई शिकायत.
— लीला तिवानी

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244

One thought on “प्रच्छन्न-सी उम्मीद

  • *चंचल जैन

    बहुत खूब

Comments are closed.