कविता

जगमग दीप जले

दीपावली के पावन पर्व
हम सब भी तो साथ चलें
जैसे जगमग   दीप   जले
अंधकार की कालिमा मिटे
खुशियों का संसार फले फूले।
शरद ऋतु ने दस्तक दी है
कार्तिक मास की पूर्णिमा है
चहुंओर दिये हैं खूब जले
करके सोलह श्रृंगार माँ लक्ष्मी
हर घर हर आंगन आई हैं।
पूजा पाठ देखकर मैया
अपना नेह लुटाने आई हैं
दीपों के इस महापर्व पर
ईर्ष्या नफरत का भेद मिटे
हम सब आओ गले मिलें।
दीपावली का पर्व आज है
गिले शिकवे हम भूल चले हैं
दीपावली के पर्व पर जैसे
जगमग जगमग दीप जले।
हम सबके जीवन में वैसे ही
सुख समृद्धि का प्रकाश फैले।
हर ओर खुशहाली हो
अपराधों का नाम न हो
बहन बेटियों रहें सुरक्षित
हर मन में खुशियां फैलें
हर जन खूब फले फूले
जगमग जगमग दीप जले।

*सुधीर श्रीवास्तव

शिवनगर, इमिलिया गुरूदयाल, बड़गाँव, गोण्डा, उ.प्र.,271002 व्हाट्सएप मो.-8115285921