लघुकथा

चुनाव

‘अब चुनाव का मौसम जिसमें चर्चा सिर्फ और सिर्फ चुनाव की ही होगी। और कुछ नहीं होगा। गरीबों पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। उनके घर राशन समय रहते पहुंचाया जाएगा। गंगा भी अगर उल्टी बहने लगें तो कोई आश्चर्य कि बात नहीं होगी।’

‘सच कहते हो यादव जी’ मोहन ने यादव जी से कहा

‘मोहन, इस बार मेरे जो पैसे आने थे वो भी आ गये है मैं उन पैसों से अपनी जरुरतें पूरी कर सकूंगा। जैसे राशन लाना।जूता भी ले लूंगा।जो पिछले महीने से लेना था।और हां कपड़े भी लेने थे। चुनाव की यहीं एक अच्छी बात होती है।सब कुछ समय पर मिल जाता है।किसी बात की कोई कमी नहीं रहती।काश ऐसा होता रहें तो अच्छा रहेगा। चुनाव तो होंगे.’

— अभिषेक जैन

अभिषेक जैन

माता का नाम. श्रीमति समता जैन पिता का नाम.राजेश जैन शिक्षा. बीए फाइनल व्यवसाय. दुकानदार पथारिया, दमोह, मध्यप्रदेश