गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

तुझको जो करना है, करना है मौला
हम इंसानों के वश में क्या है मौला

हमने देखे है मुर्दे जिंदा होते
सब तेरी रहमत का जलवा है मौला

हमने रखा दर्पण जैसा जीवन को
दर्पण भी तो आखिर शीशा है मौला

तू जो मुझमें तू है बस वो ही सच है
बाकी सब मिथ्या है दोखा है मौला

खुदगर्जी है तो कायम है रिश्ते भी
वरना किसका कोई अपना है मौला

इंसां भेजा था, लोटूँगा इंसां ही
मेरा तुझसे इतना वादा है मौला

— सतीश बंसल

*सतीश बंसल

पिता का नाम : श्री श्री निवास बंसल जन्म स्थान : ग्राम- घिटौरा, जिला - बागपत (उत्तर प्रदेश) वर्तमान निवास : पंडितवाडी, देहरादून फोन : 09368463261 जन्म तिथि : 02-09-1968 : B.A 1990 CCS University Meerut (UP) लेखन : हिन्दी कविता एवं गीत प्रकाशित पुस्तकें : " गुनगुनांने लगीं खामोशियां" "चलो गुनगुनाएँ" , "कवि नही हूँ मैं", "संस्कार के दीप" एवं "रोशनी के लिए" विषय : सभी सामाजिक, राजनैतिक, सामयिक, बेटी बचाव, गौ हत्या, प्रकृति, पारिवारिक रिश्ते , आध्यात्मिक, देश भक्ति, वीर रस एवं प्रेम गीत.