बहुमूल्य योगदान
बड़े गुस्से से वो निकले थे
पूरे लाव लश्कर के साथ
उस मतदाता के
हाथ पांव तोड़ने,
तभी चुनावों की तारीखों का
एलान हो गया,
त्वरित नेताजी परेशान हो गया,
अब वो उसी लाव लश्कर के साथ
घूम रहे हैं हाथ पांव जोड़ते,
चंद घंटे पहले की अकड़ छोड़ते,
ये किस्सा गिरती हुई नैतिकता का
पूरा हाल बता गया,
और सब जान गए कि
मौकापरस्त राजनीति का
ये खूबसूरत दौर है नया,
तो अब नेताजी घर घर जा
सही काम का भरोसा दिलाएंगे,
गिर पैरों पर गिड़गिड़ाएंगे,
पिला चार पेटी,
खिला दो बोटी,
फिर अपनी ईमानदार छवि के दम पर
वहीं सीट फिर से जीत लाएंगे,
तथा देश की उन्नति में
अपना बहुमूल्य योगदान दे पाएंगे,
हमें भरपूर भरोसा है कि
यह नेता संविधान को खत्म होने से बचाएंगे,
और वोटरों के घर
वहीं पुराने गरीबी व भुखमरी के
दिन ला पाएंगे।
— राजेन्द्र लाहिरी
