धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

रक्षाबंधन -विश्वास का धागा 

एक विश्वास का धागा जो दूर रहकर हर साल राह देखता रक्षाबंधन की।दूर विदेशों में बसे और सीमाओं पर डटे भाइयों की सूनी कलाइयों में बांधने की राह देखते धागे स्नेह और विश्वास के संग चिठ्ठीयां में बैठ कर आते।बहना की तस्वीर झलक जाती और आशीर्वाद के फूल आंसू के रूप में गिरने लग जाते।भाई बहनों का त्योहार रक्षा बंधन रक्षा कवच के रूप में बंधे धागे से बिना बोले चिट्ठियों से,संदेशो से दुख सुख बता कर जाता है।बहनें भी अपने भाइयों से सहायता की अपेक्षा रखती।रक्षा बंधन में रिश्ते की अहमियत ताउम्र तक बरकरार रहती।जिनकी बहनें और जिनके भाई नही होते वे भी ऊपर वाले की कृपा से रक्षाबंधन पर्व पर बनाये गए रिश्ते को जिंदगी भर निभाकर अपनी बहन की रक्षा का कर्तव्य निभाते आ रहे है।भारतीय संस्कृति की परंपरा पर गर्व है।समयानुकूल दूर जा बस जाने व किसी कारणवश ना जा पाने की वजह से दुख तो अवश्य होता किन्तु रक्षाबंधन की शुभकामनाएं बहन भाइयों के लिए चिट्ठियों और मोबाइल संदेश के बीच रक्षाबंधन पर्व पर बचपन से अब तक का सफर की छोटी छोटी घटनाओं को एक एलबम के रूप में दर्शन करवा कर दूरियों को परे रख यादों को ताजा कर जाती है।बहनों भाइयों की छोटी छोटी नाराज़गी को रक्षाबंधन के स्नेह का भेजा या बांधे जाने वाले धागा’राखी’,क्षण भर में छूमंतर कर सुकून का वातावरण निर्मित कर देता है।

— संजय वर्मा “दृष्टि” 

*संजय वर्मा 'दृष्टि'

पूरा नाम:- संजय वर्मा "दॄष्टि " 2-पिता का नाम:- श्री शांतीलालजी वर्मा 3-वर्तमान/स्थायी पता "-125 शहीद भगत सिंग मार्ग मनावर जिला -धार ( म प्र ) 454446 4-फोन नं/वाटस एप नं/ई मेल:- 07294 233656 /9893070756 /antriksh.sanjay@gmail.com 5-शिक्षा/जन्म तिथि- आय टी आय / 2-5-1962 (उज्जैन ) 6-व्यवसाय:- ड़ी एम (जल संसाधन विभाग ) 7-प्रकाशन विवरण .प्रकाशन - देश -विदेश की विभिन्न पत्र -पत्रिकाओं में रचनाएँ व् समाचार पत्रों में निरंतर रचनाओं और पत्र का प्रकाशन ,प्रकाशित काव्य कृति "दरवाजे पर दस्तक " खट्टे मीठे रिश्ते उपन्यास कनाडा -अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विश्व के 65 रचनाकारों में लेखनीयता में सहभागिता भारत की और से सम्मान-2015 /अनेक साहित्यिक संस्थाओं से सम्मानित -संस्थाओं से सम्बद्धता ):-शब्दप्रवाह उज्जैन ,यशधारा - धार, लघूकथा संस्था जबलपुर में उप संपादक -काव्य मंच/आकाशवाणी/ पर काव्य पाठ :-शगुन काव्य मंच