कुण्डली/छंद

मैत्री 

बंधन मैत्री का सखे, रिश्ता है अनमोल।

धूप-छाँव या गम खुशी, करना कभी न तोल।।

करना कभी न तोल, नेह कृष्ण सुदामा-सा।

ऐसा हो प्रिय मित्र, साथ रहता साया-सा।।

*चंचल जैन

मुलुंड,मुंबई ४०००७८