मैत्री
बंधन मैत्री का सखे, रिश्ता है अनमोल।
धूप-छाँव या गम खुशी, करना कभी न तोल।।
करना कभी न तोल, नेह कृष्ण सुदामा-सा।
ऐसा हो प्रिय मित्र, साथ रहता साया-सा।।
बंधन मैत्री का सखे, रिश्ता है अनमोल।
धूप-छाँव या गम खुशी, करना कभी न तोल।।
करना कभी न तोल, नेह कृष्ण सुदामा-सा।
ऐसा हो प्रिय मित्र, साथ रहता साया-सा।।