दोहा
बिन चाकू तलवार के,किया नैन से वार |
घायल दिल की टीस का,तुम ही हो उपचार ||
आकर हमें सँभाल लो,मचल रहे जज्बात |
सिर्फ तुम्ही से हर समय,करते हैं हम बात ||
रात,चाँदनी,चाँद सब,व्याकुल पूछें हाल |
नयन नींद को खोजते,हम बेसुध बेहाल ||
दिल करता है आपका,हर समय इंतजार |
हर आहट पर दिल कहे, आप खड़े हो द्वार ||
बेकरार दिल है, गया, जाने कहां करार |
पर मिलने पर आपसे, मिलना है दुश्वार ||
— शालिनी शर्मा
