गीत/नवगीत

सत्यमेव जयते

आज एक बार फिर सत्य
आखिरकार सर चढ़कर बोला,
झूठ,फरेब और साजिश का
सारा कच्चा चिट्ठा खोला।।

तथ्य-विहीन सब आरोप पाए
न्याय ने अन्याय के छक्के छुड़ाए,
सारे सबूतों को साजिशन बताया
सत्रह वर्ष बाद यह निर्णय सुनाया

सत्य का पक्ष पड़ा सब पर भारी
अन्याय का सिंहासन डोला।
आज एक बार फिर सत्य
आखिरकार सर चढ़कर बोला।।

एक भी दलील फिर ठहर न पाई
अन्ततः बेगुनाही मुस्कराई,
तमाम बयानों को मनगढ़ंत पाया
सनातन के लिए शुभ दिन आया।

सभी आरोपियों को दी आजादी
विरोधी पक्ष की चूले हिला दीं,
कुछ भी साबित न कर सके वह
जेल में ठूंसा गया था बेवजह ।

सरकारी तंत्र का हुआ दुरुपयोग
हर तर्क-कुतर्क निकल गया पोला
आज एक बार फिर सत्य
आखिरकार सर चढ़कर बोला।।

कोशिशें बहुत की सनातन को
नेस्तनाबूद करने के लिए,
यातनाएं भी तमाम दीं उनको
आरोप स्वीकार करने के लिए

लेकिन हुए न वो टस से मस
छाया रहा घोर असमंजस,
आखिर समय ने भी ली करवट
धीरे-धीरे छटने लगे सारे संकट।

ईश्वर सदैव सत्य के साथ खड़ा है
बोलो सब मिल बम-बम भोला।
आज एक बार फिर सत्य
आखिरकार सर चढ़कर बोला।।

वैसे न्याय-अन्याय की यह लड़ाई
हर युग में लड़ी जाती रही है,
क्षण भर को भले ही हमको लगे
न्याय की पताका फहराती रही है।

आगे भी ऐसे तमाम पल आएंगे
सत्य के पंख कतरे जाएंगे,
देनी होगी पग-पग पर परीक्षा
कदम -कदम पर होगी समीक्षा

अन्ततः विजय न्याय की ही होगी
यही शास्त्र सम्मत यही वेद बोला।
आज एक बार फिर सत्य
आखिरकार सर चढ़कर बोला।।

आज एक बार फिर सत्य
आखिरकार सर चढ़कर बोला
झूठ,फरैब और साज़िश का
सारा कच्चा चिट्ठा खोला ।।

— नवल अग्रवाल

*नवल किशोर अग्रवाल

इलाहाबाद बैंक से अवकाश प्राप्त पलावा, मुम्बई